खटीमा। गन्ने के तने के टुकड़े बनाकर बोने से करीब 30 फीसदी गन्ना नहीं उगता है लेकिन अगर पौध तैयार कर गन्ना बोया जाए तो यह शत-प्रतिशत उगता है। इस विधि से गन्ना बर्बाद नहीं होता है। इस विधि से तैयार गन्ना गुणकारी और वजनी होता है। खटीमा में वैज्ञानिक तरीके से कृषि को बढ़ावा देने वाले किसान किरन तलवार करीब पांच एकड़ भूमि में गन्ने की पौध तैयार कर रहे हैं।
तलवार पंजाब की उन्नत किस्म के गन्ने को खराब किए बिना उसकी गांठ से आंख निकालकर ट्रे नुमा कुप्पियों में अंकुरित होने के लिए छोड़ देते हैं। अंकुरित आंख को उगाकर गन्ने की पौध तैयार की जाती हैं। इसमें खुराक के लिए को कोपिट, बुरादा और केचुए की खाद का मिश्रण बनाया जाता है। किरन बताते हैं कि उनकी नर्सरी करीब 10 वर्ष से चल रही है। इसमें आसपास के लगभग 250 से अधिक ग्रामीण काम करते हैं।
लाभ के लिए नहीं फसल पैटर्न बदलने का प्रयास
किरन तलवार कहते हैं कि आंख वाले गन्ने की किस्म विकसित करने के पीछे लाभ कमाने का मकसद नहीं है। यह फसल के पैटर्न को बदलने का प्रयास है। इस किस्म के विकसित होने से चीनी उद्योग का विकास होगा। बता दें कि किरन वर्ष 1972 में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त चुके हैं। कृषि में नए वैज्ञानिक तौर तरीके अपनाना उनकी खासियत है। उन्हें वर्ष 2008-09 में सर्वश्रेष्ठ कृषक सम्मान से सम्मानित किया गया है।