रुद्रपुर। औद्योगिक शहर में प्रस्तावित ट्रांसपोर्टनगर का इंतजार लंबा खिंच रहा है। ट्रांसपोर्टनगर के लिए जमीन के साथ ही डीपीआर और डिजाइन तैयार है लेकिन बजट की व्यवस्था नहीं हो सकी है। 11 महीने पहले जिला विकास प्राधिकरण ने शहरी विकास विभाग को प्रोजेक्ट को विश्व बैंक को प्रस्तावित करने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन विश्व बैंक की टीम की विजिट के इंतजार में मामला लटका हुआ है। प्राधिकरण भी खुद के संसाधनों से प्रोजेक्ट को शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
रुद्रपुर में लंबे समय से ट्रांसपोर्टनगर की मांग हो रही है। यह मामला कई बार विधानसभा में भी उठ चुका है। तीन साल पहले जिला प्रशासन ने फाजलपुर महरौला में शिक्षा विभाग की 46 एकड़ जमीन चिह्नित की थी। इसे प्राधिकरण को हस्तांतरित होने में दो साल का वक्त लग गया था। इसके बाद प्राधिकरण ने प्रोजेक्ट का डिजाइन और डीपीआर तैयार की। पहले प्राधिकरण ने प्लाट की एडवांस बुकिंग कर स्लैब में मिलने वाले रुपयों से प्रोजेक्ट को शुरू करने का फैसला लिया था, मगर इससे हाथ खींच लिए थे। प्राधिकरण ने प्रोजेक्ट को विश्व बैंक से वित्त पोषित करने के लिए शहरी विकास विभाग को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन इस पर फैसला नहीं हो सका है।
यह थी योजना
करीब 55 करोड़ की लागत से ट्रांसपोर्टनगर का निर्माण किया जाना था। इसमें स्पेयर पार्ट्स और मैकेनिक के लिए दुकानें, टर्मिनल, ट्रांसपोर्ट कंपनियों के दफ्तर, पेट्रोल पंप, क्लीनिक, एटीएम, होटल के साथ ही सड़क, ड्रेनेज, सीवर सिस्टम बनाया जाना था। ट्रांसपोर्टनगर बनने से शहर में विभिन्न जगहों पर वाहनों के खड़े होने से लगने वाले जाम से निजात मिलती, वहीं व्यवसायिक गतिविधियों से कईं लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
प्राधिकरण में सचिव और अधिशासी अभियंता नहीं
रुद्रपुर। जिला विकास प्राधिकरण स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। इसके चलते प्राधिकरण के प्रोजेक्ट सहित अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। प्राधिकरण में सचिव का पद अक्तूबर से खाली चल रहा है। अधिशासी अभियंता का पद खाली है। एई को प्रभारी अधिशासी अभियंता का जिम्मा सौंपा गया है और वे भी चार महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसके साथ ही तीन एई के पदों में एक और सात जेई के पदों में तीन जेई तैनात हैं। तीन में से दो जेई सिंचाई विभाग के हैं। प्राधिकरण उपाध्यक्ष हरीश चंद्र कांडपाल ने बताया कि शासन को रिक्त पदों को भरने की डिमांड भेजी गई है। संवाद
डीडीए के उपाध्यक्ष हरीश कांडपाल का कहना है कि ट्रांसपोर्टनगर का प्रोजेक्ट शहरी विकास विभाग के जरिये विश्व बैंक के लिए प्रस्तावित किया गया है। विश्व बैंक की टीम प्रोजेक्ट के लिए स्थलीय भ्रमण कर फिजिबिलिटी के आधार पर प्रोेजेक्ट पर फैसला करेगी। इसकी डीपीआर को भी रिवाइज किया जाएगा। अगर विश्व बैंक से प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिलती है तो प्राधिकरण अपने स्तर से प्रोजेक्ट के लिए कोशिश करेगा।