- राजकीय स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है असर
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे शिक्षक-शिक्षिकाओं को मूल पदों पर वापस भेजने के बाद जिले में बीआरपी (ब्लॉक रिसोर्स पर्सन) और सीआरपी (क्लस्टर रिसोर्स पर्सन) के 48 पद पिछले चार साल से रिक्त चल रहे हैं। इससे शिक्षा विभाग की योजनाओं के बारे में शिक्षकों और बच्चों के अभिभावकों को सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है।
ऊधमसिंह नगर में शिक्षा विभाग के ब्लॉक स्तर पर वर्तमान में बीआरपी के 21 और सीआरपी के 27 पद हैं। वर्ष 2018 में सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद बीआरपी और सीआरपी के पदों पर कार्यरत शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेज दिया गया था। वर्ष 2019 तक लगभग सभी शिक्षक मूल पदों पर वापस चले गए थे। इसके बाद से यह पद रिक्त चल रहे हैं। दरअसल, बीआरपी और सीआरपी का कार्य शिक्षकों को अकादमिक सहयोग और शिक्षा विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी देना है। पद रिक्त होने से समन्वय की यह प्रक्रिया ठप हो गई है। इसका असर राजकीय स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र आर्या कहते हैं कि बीआरपी व सीआरपी के रिक्त पदों पर शासन स्तर पर आउटसोर्स से भर्ती करने की तैयारी चल रही है। इन पदों पर उपनल से भी भर्ती हो सकती है। उन्होंने कहा कि पदों के रिक्त होने से विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है। बीआरपी व सीआरपी की नियुक्ति के बाद कार्य पटरी पर लौट सकेगा।
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शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से स्कूलों की पढ़ाई हो रही थी प्रभावित
रुद्रपुर। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि शिक्षक-शिक्षिकाओं की बीआरपी व सीआरपी पर प्रतिनियुक्ति के कारण स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। इससे कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी की समस्या भी खड़ी हो रही थी। शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेजने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है। संवाद