खटीमा। सीएम पुष्कर सिंह धामी के गांव नगला तराई में नेपाल की अंतरराष्ट्रीय खुली सीमा पर बहने वाले सनिया नाले पर पुल निर्माण न होने से दो देशों की जनता परेशान है। खतरा उठाकर लोग विशाल नाले के पानी से होकर आवाजाही कर रहे हैं। वर्ष 2021 में नाला पार करने के दौरान एसएसबी का ट्रैक्टर बह गया था, जबकि छह-सात वर्ष पूर्व नाले में डूबकर गांव के ही एक युवक की मौत हो गई थी।
सीमांत गांव नगला तराई के बाजार का 80 फीसदी व्यापार नेपाल पर निर्भर है। अन्य कार्य से दो देशों के लोग इस नाले से आवाजाही कर रहे हैं। ऐसे में कई बार पानी के तेज बहाव में बहने का खतरा बना रहता है।
नगला तराई रामलीला कमेटी के अध्यक्ष राम सिंह धामी बताते हैं कि बरसात में नाले के पानी से लबालब होने पर आवाजाही बंद रहती है जिस कारण नाले को पार कर नेपाल की सीमा में पहुंचे पालतू मवेशियों को वापस लाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में ह्यूम पाइप डालकर नाले में पुल बनाया था लेकिन वर्ष 2013 में तेज बारिश के चलते पुल बह गया था। इसके बाद दोबारा पुल निर्माण नहीं हो सका।
सनिया नाले के पार एसएसबी 57वीं की चौकी है। एसएसबी के जवान अपने ट्रैक्टर से नाला पार करते हैं। गश्त के दौरान एसएसबी के जवानों को परेशानी होती है।
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बीएडीपी से पुल निर्माण के प्रयास
खटीमा। सनिया नाले पर सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) से पुल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बीडीओ केएस सामंत बताते हैं कि ग्राम पंचायतों का बजट कम होता है। इस कारण नगला तराई ग्राम पंचायत के बजट से पुल निर्माण संभव हो पा रहा। बीएडीपी, राज्य व केंद्र वित्त आयोग से पुल निर्माण संभव है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को बोर्ड बैठक में प्रस्ताव देना होगा।
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सनिया नाले पर पुल निर्माण को लेकर पूर्व में भी प्रयास किए जा चुके हैं। एक बार ह्यूम पाइप से बना पुल बह चुका है। उसके बाद दोबारा पुल नहीं बन सका। - रीती कोहली, ग्राम प्रधान, नगला तराई
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नेपाल सीमा पर एसएसबी की चौकी सनिया नाले के उस पार है। इस कारण एसएसबी के जवान ट्रैक्टर से नाला पार करते हैं। बरसात में पानी अधिक होने से एसएसबी के जवानों को करीब साढ़े तीन किमी दूर धनुष पुल के रास्ते पहुंचना पड़ता है। - सुरेश कुमार तोमर, द्वितीय कमान अधिकारी, 57वीं वाहिनी एसएसबी।