पंतनगर। पाम के पत्ते घर, दुकान और कार्यालयों की शोभा बढ़ाएंगे। पंतनगर विवि के छात्रों ने पाम के पत्तों से प्लाई बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की है। दावा है कि यह बोर्ड जलरोधी और उपलब्ध बोर्ड से तीन गुना तक मजबूत है। इसके पेटेंट की तैयारी की जा रही है।
विज्ञान एवं मानविकी की महाविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग में प्राध्यापक डाॅ. एमजीएच जैदी और सहायक प्राध्यापक डाॅ. समीना महताब के निर्देशन में एमएससी के छात्र राहुल पटवाल और वैभव आर्या ने परास्नातक शोध में पाम के पत्तों और प्लास्टिक अपशिष्ट को यूकेलिप्टस व पॉपलर की लकड़ी के विकल्प के रूप में प्लाई बोर्ड निर्माण के लिए प्रयोग किया है। इस तकनीक के बोर्ड बाजार में आने के बाद इन पेड़ों के कटान को नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे मिट्टी संरक्षण तो होगा ही, ग्रामीण क्षेत्रों में पाम के पत्ते एकत्र करने से लोगों को नए रोजगार सृजित होंगे। अभी तक इन पत्तों का कोई व्यावसायिक उपयोग नहीं हो रहा था।
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ऐसे बनता है बोर्ड
डॉ. समीना ने बताया कि सबसे पहले पाम की पत्तियों को सुखाया जाता है। फिर इन पत्तों को अपशिष्ट प्लास्टिक पदार्थों की उपस्थिति में परत दर परत संयोजन किया जाता है। इसके बाद उच्च दबाव और ताप में हार्ड प्रेस किया जाता है। इसके सूखने के बाद मनचाहे आकार में काटकर प्लाई बोर्ड का निर्माण होता है। इस बोर्ड की मजबूती बाजार में उपलब्ध अन्य बोर्ड से लगभग तीन गुना तक अधिक पाई गई है। प्लास्टिक अपशिष्ट और पान के पत्ते जल रोधी होने के कारण इनसे बनी प्लाई बोर्ड भी जलरोधी है।
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औद्योगिक स्तर पर प्लाई बोर्ड बनाने के लिए फिनोल फार्मल्डिहाइड का उपयोग किया जाता है। इसके दहन से कार्बन मोनो ऑक्साइड उत्पन्न होती है, जो मानव शरीर के फेफड़ों से ऑक्सीजन खत्म कर देती है। वर्तमान तकनीक में प्लास्टिक अपशिष्ट को फिनोल फार्मल्डिहाइड के विकल्प के रूप में प्रयोग किया गया है। इससे पाम के पत्तों के साथ अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग होने से पूरी निर्माण प्रक्रिया पर्यावरण हितैषी है। - डाॅ. एमजीएच जैदी, प्राध्यापक रसायन विज्ञान, पंतनगर विवि