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बायोटेक का हुआ नैनीताल का पटवाडांगर जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, वर्ष 1903 में स्थापित पटवाडांगर पूर्व में स्टेट वैक्सीन इंस्टीट्यूट के नाम से था प्रसिद्ध

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पटवा डांगर स्थित जैव प्रौद्योगिकी संस्थान - फोटो : AMAR UJALA
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पंतनगर। जी बी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के नियंत्रणाधीन जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, पटवाडांगर आखिरकार उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बायोटेक), हल्दी को हस्तांतरित कर दिया गया है। शासन द्वारा जारी इस आशय के आदेश से कुमाऊं विश्वविद्यालय को तगड़ा झटका लगा है। वर्ष 1903 में स्थापित जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (पटवाडांगर) पूर्व में राज्य रक्षालय संस्थान (स्टेट वैक्सीन इंस्टीट्यूट) के नाम से प्रसिद्ध था। पूर्व में स्माल पॉक्स को खत्म करने के उद्देश्य से भारत में वैक्सीन का निर्माण पटवाडांगर से ही हुआ, और भारत को स्माल पोक्स मुक्त करने में इस संस्थान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 1957 में इस संस्थान ने एंटी रैबीज नर्वस टिश्यू नामक वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया। इसके बाद टिटनेस वैक्सीन का उत्पादन भी यही से हुआ, जो 2003 तक किया गया। पुरानी तकनीक एवं डब्लूएचओ द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप गुड मैन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस नहीं होने के कारण सभी वैक्सीनों का उत्पादन बंद करना पड़ा। अक्टूबर 2005 में राज्य सरकार ने राज्य वैक्सीन संस्थान, पटवाडांगर को जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर इसकी स्थापना ’जैव प्रौद्योगिकी संस्थान’ के रूप में कर दी। चौदह वर्षों तक यह संस्थान पंतनगर विवि के पास रहने के उपरांत वर्ष 2019 मेंबुआवकुमाऊं विवि के अधीन देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जैव प्रौद्योगिकी संस्थान पटवाडांगर एवं उत्तराखंड जैव प्रौद्योगकी परिषद् हल्दी गतिविधियां, क्रिया-कलाप व उद्देश्य एक समान होने एवं पंतनगर विवि कुलपति डॉ. तेज प्रताप की सहमति के बाद आखिरकार दो दिन पूर्व इसे उत्तराखंड शासन द्वारा बायोटेक हल्दी को सौंप दिया गया। ---::: पंतनगर विवि कुलपति की सहमति के उपरांत यह कार्य संभव हो पाया है। विवि द्वारा जैव प्रौद्योगिकी संस्थान पटवाडांगर को आगे बढ़ाने मे सतत प्रयास किया गया। हस्तांतरण के उपरांत पटवाडांगर में जैव विविधता पार्क, जैव विविधता आंकलन, संग्रह व संरक्षण केंद्र, वाणिज्यिक ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला, हाईटेक पर्वतीय कृषि उत्कृष्टता केंद्र,  स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली सुधार केंद्र व अन्य आवश्यक गतिविधियों को स्थापित एवं संचालित करने का प्रस्ताव है। परिषद् को अपनी गतिविधिओं को विस्तारित करने में तीव्रता आएगी। शासन एवं विवि परिवार का विशेष धन्यवाद"" -प्रोफेसर डीके सिंह, निदेशक जैव प्रौद्योगिकी परिषद…, हल्दी  
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