जसपुर। पचास हजार रुपयों का लालच देकर बिलर ने ट्रक ड्राइवर के अभिलेख से फर्म बना ली और लाखों रुपयों का लेनदेन कर फर्जीवाड़ा कर लिया। पैसे न मिलने से ट्रक ड्राइवर खुद को ठगा महसूस कर रहा है।
मोहल्ला नई बस्ती निवासी सईद अहमद ने बताया कि वह ट्रक ड्राइवर है। सड़क दुर्घटना में पैर टूटने से बिस्तर पर था। पिछले चार माह पहले नगर निवासी एक व्यक्ति ने इलाज के लिए सरकारी योजना की जानकारी दी और पचास हजार रुपयों का झांसा देकर आधार और पेन कार्ड के जरिये बैंक में खाता खुलवा दिया। कुछ दिन पहले जीएसटी अधिकारियों के छापे से पता चला कि बिलर ने उसके अभिलेख के जरिये मीरा इंटर प्राइजेज और सोनम इंटर प्राइजेज के नाम से फर्म बनाई है। उसे इसके बारे में पता नहीं था और न ही उस व्यक्ति ने उसे कोई पैसे दिए थे।
इस संबंध में जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) के उपायुक्त रजनीश यशवस्थी ने बताया कि उक्त ड्राइवर के अभिलेख से दो फर्म संचालित हैं। दो दिन पहले ही बिलर ने एक फर्म में पांच लाख रुपये टैक्स जमा कराया है। बिलर के नाम का होली के बाद खुलासा किया जाएगा। किन-किन गरीबों, मजदूरों और बुजुर्गों का इस्तेमाल बिलर ने किया, उनकी सूची भी उजागर की जाएगी। उन्होंने अपील की कि जो व्यक्ति बिलर की गोपनीय सूचना और साक्ष्य प्रस्तुत करेगा, उसका नाम गोपनीय रखा जाएगा।
जीएसटी अधिकारियों के 10 से 12 लोगों ने एक महीने से अधिक समय में 16-16 घंटे काम कर बिलर की छानबीन की।
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चार मार्च को 27 टीमों ने मारा था छापा
ज्ञात हो कि चार मार्च को उत्तराखंड कर कमिश्नर डाॅ. अहमद इकबाल के आदेश पर जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा के संयुक्त निदेशक रणवीर सिंह की अगुवाई में 27 टीमों के कर्मचारियों ने छापा मारकर 18 करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी थी, जो जांच के बाद चार सौ करोड़ के करीब पहुंचने की उम्मीद है।
इनसेट
एकतरफा कार्रवाई से व्यापारियों में रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
जसपुर। 76 वर्षीय लकड़ी व्यापारी मो. उमर ने कहा कि लकड़ी व्यापार मंडल और वरिष्ठ व्यापारियों को विश्वास में लिए बिना विभाग ने एकतरफा कार्रवाई की जो निंदनीय है। विभाग ने प्रतिष्ठित पुरानी लकड़ी मंडी की छवि को खराब करने का अनुचित प्रयास किया। युवा व्यापारियों के बढ़ते कदम को रोककर मनोबल तोड़े जाने से मंडी में भय का माहौल है। 72 वर्षीय लकड़ी व्यापारी सईद अहमद ने कहा कि डेढ़ सौ साल पुरानी मंडी में छापे से व्यापारियों में आक्रोश है। मेहनत, मजदूरी कर व्यापारियों ने अपना कारोबार जमाया है। विभागीय कार्रवाई से सही व्यापारी भी खौफ में हैं।
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