जसपुर। शादियों में दहेज के बढ़ते प्रचलन पर काबू पाने के लिए उलेमाओं ने अनोखा फैसला लिया है। उलेमाओं की पंचायत ने दहेज की नुमाइश और मांग पर रोक लगा दी है, ताकि एक दूसरे को देखकर लोग इसे बढ़ावा देने से बचें। कई गलत रीति-रिवाजों के साथ ही शादी समारोह में खड़े होकर खाना खिलाने पर भी पूर्ण पाबंदी लगाई गई है। इसके अलावा कुल 28 नियम कायदे बनाए गए हैं। सभी बिरादरी के लोगों ने फैसले का स्वागत किया।
मदीना मैरिज हॉल में आयोजित पंचायत में तहरीक इस्लाहे मुआशरा उलमा-ए-अहलेसुन्नत का गठन किया गया। जामा मस्जिद के इमाम मौलाना साजिद रजा को सदर और शहर इमाम कारी अय्यूब नूरी को नायब सदर बनाया गया। इस दौरान बारात के पकवान की तादाद भी सीमित कर गई। अब लड़की वाला बिरादरी को खाना न देकर बरातियों को सिर्फ पांच तरह का खाना खिलाएगा। शादी से हल्द्वी, सगाई, त्योहारी भेजना, गोद भराई, कहन-सुनन, चूड़ी पहनाइ, बेपर्दगी पर भी पाबंदी लगाने का फैसला लिया गया है। नियमों का पालन कराने के लिए मोहल्ला स्तर पर कमेटी का गठन करने का फैसला लिया गया।
पिछले कई दिनों से नगर के प्रत्येक मोहल्ले की मस्जिदों में पहले लोगों को जागरूक किया। उसके बाद सभी बिरादरी के लोगों को जमा करके समाज में फैल रही बुराइयों पर चर्चा की गई। आम पंचायत में सभी की सहमति से नियम बनाए गए। नियमों का पालन न करने पर तय किया गया कि उलेमा उसका बायकाट कर नमाज-ए-जनाजा और निकाह तक नही पढ़ाएंगे।
-मौलाना साजिद रजा, सदर तहरीक इस्लाहे मुआशरा उलमा-ए-अहलेसुन्नत, जसपुर।
इन पर लगाई गई पाबंदी
:- युवतियों द्वारा दूल्हे और उसके साथियों का स्वागत।
:- खड़े होकर खाना, महिलाओं की बेपर्दगी।
:- महिलाओं का मर्दों के साथ भोजन करना।
:- दहेज की मांग, आतिशबाजी, गाना, वीडियोग्राफी।
:- किसी भी त्योहार पर त्योहारी लेना।
:- दूल्हा-दुल्हन का एक साथ बैठकर भोजन खाना और नुमाइश।
:- लड़की वाले का बिरादरी को खाना देना।
:- बिना किसी वजह के तलाक देना।
:- रिश्ते में लड़के को सोने की अंगूठी देना या लड़के की मां व किसी भी रिश्तेदार को आभूषण देना।
इन पर लिया गया फैसला
:- विवाह के प्रोग्राम में उलेमाओं से मशविरा करना होगा।
:- जन्मदिन पर बेहूदा रस्मों से परहेज किया जाएगा।
:- तलाक के मामलों में उलेमाओं को शरीक करना जरूरी
:- बरात में पांच तरीके का खाना ही बनवाना होगा।
:- लड़कियों का मोबाइल फोन इस्तेमाल सीमित करना।