काशीपुर। महिला एवं बाल सहायता समिति की अध्यक्ष व महिला उत्पीड़न संबंधी मामलों की काउंसलर सरोज सिंह ठाकुर ने कहा कि परिवार में महिलाओं का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। जब हमारे परिवार की महिला शिक्षित होगी तभी परिवार शिक्षित होगा। उन्होंने कहा आज के दौर में महिलाओं का जागरूक होना जरूरी है। हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं और परिवार के भरण-पोषण में हाथ बटा रही हैं।
ग्राम गोपीपुरा पांडे कॉलोनी में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ ग्राम गोपीपुरा की ग्राम प्रधान रीना, रेखा बेलवाल, शालिनी अग्रवाल, जयमाला ठाकुर व समिति अध्यक्ष ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके किया। समिति के लिटिल सोशल वारियर ने मां सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद समिति की छात्र-छात्राओं ने आमजन को जागरूक करने के लिए भ्रूण हत्या पर मार्मिक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया जिसके देखकर मौजूद महिलाएं भावुक हो गईं।
काउंसलर सरोज सिंह ठाकुर ने कहा कि महिलाओं को यहां तक पहुंचाने में शिक्षा और जागरूकता ने बहुत अहम रोल अदा किया है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक होना होगा। क्योंकि वह सभी कार्यों को सरल-सहज रूप से कर लेती हैं। उन्होंने अपराजिता का मतलब समझाते हुए कहा कि जो किसी से पराजित नहीं हो और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती जाए उसे निश्चित सफलता मिलेगी। साथ ही उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और भ्रूण हत्या के प्रति लोगों को जागरूक किया। बच्चों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर अपनी प्रस्तुति दी। इस दौरान प्रधान पति धर्मेंद्र सिंह, जिला पंचायत सदस्य विपिन कुमार, कंचन, फूला देवी, सुषमा देवी, मीना देवी, राहुल सिंह आदि मौजूद रहीं।
- आज भी समाज में लड़कियों की शिक्षा पर ज्यादा गौर नहीं दिया जाता है। जबकि आज के युग में बेटा-बेटी एक सामान है। तब इस तरह का भेदभाव क्यों होता है। आज लड़कियां पढ़-लिखकर उच्च पदों पर बैठी हैं इसलिए हमें अपनी बेटियों को भी उच्चा शिक्षा दिलाना चाहिए ताकि वह किसी से पीछे नहीं रहें।
रीना देवी, ग्राम प्रधान, ग्राम गोपीपुरा।
- महिला सशक्तीकरण के तहत समय-समय पर शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने और सामाजिक सम्मान व हक की लड़ाई जैसे मुद्दे आते रहते हैं। समाज को आज इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आज महिला किसी पुरुष से कम नहीं है। महिलाएं आज पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
रेखा बेलवाल, शिक्षिका।
- यदि आज हम एक परिवार को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उसमें महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। महिला से ही एक घर-परिवार बनता है। वरना सब कुछ सूना है। इसलिए समाज को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए क्योंकि सम्मान नारी का अधिकार है।
शालिनी अग्रवाल, शिक्षिका
- समाज में आज भी कई परिवार ऐसे हैं जो अपनी बेटियों का ज्यादा शिक्षित करने से परहेज करते हैं और बेटों की पढ़ाई पर कोई रोकटोक नहीं करते हैं। आखिर यह भेदभाव क्यों। जब तक घर की महिला शिक्षित नहीं होगी तब तक परिवार शिक्षित नहीं होगा।
जयमाला ठाकुर