रुद्रपुर। मित्र राष्ट्र नेपाल की खुली सीमाएं होने के बावजूद प्रत्यर्पण संधि न होने का फायदा अपराधी उठा रहे हैं। बढ़े अपराध करके बाद अथवा पुलिस से बचने के लिए कई अपराधी नेपाल को अपनी शरणस्थली बना रहे हैं।
मुंबई में वर्ष 2011 में पत्रकार जे डे की हत्या में उम्रकैद का सजायाफ्ता कैदी हल्द्वानी निवासी दीपक सिसोदिया अपनी पैरोल से फरार होकर नेपाल में छुप गया था। तब से कई एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थी। छोटा राजन गिरोह से जुड़े दीपक की गिरफ्तारी के लिए उत्तराखंड पुलिस पिछले एक साल से प्रयास कर रही थी, लेकिन नेपाल में छिपे होने के कारण उसकी गिरफ्तारी संभव नहीं हो पा रही थी। एसटीएफ के अधिकारियों का कहना था कि नेपाल की सीमा खुली हैं, लेकिन वर्दी में नेपाल जाकर अपराधी को पकड़ना नहीं है।
उन्होंने कहा कि नेपाल भले ही भारत का मित्र राष्ट्र है, लेकिन दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं हैं। इस कारण अपराधी के नेपाल में छिपे के बावजूद मित्र राष्ट्र अपराधी को भारत को नहीं सौंप सकता है। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि वह नेपाल से चोरी-छिपे हल्द्वानी आता है। रविवार रात दीपक के चंपावत जिले के नेपाल सीमा से सटे बनबसा आने की सूचना मिलने पर रुद्रपुर एसटीएफ की टीम पहुंची थी। टीम ने बनबसा रेलवे स्टेशन के पास से धर दबोचा।
एसएसपी एसटीएफ आयुष अग्रवाल के मुताबिक, दीपक को मुंबई की कोर्ट ने पत्रकार जे डे की हत्या शामिल होने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह महाराष्ट्र की अमरावती सेंट्रल जेल में बंद था। जनवरी 2022 को उसे 45 दिन की पैरोल पर रिहा किया गया था, उसे पैरोल की अवधि मार्च में खत्म होने पर अमरावती जेल लौटना था, लेकिन वह फरार हो गया। उसने डॉन छोटा राजन गिरोह के शूटरों के साथ इस हत्याकांड को अंजाम दिला था।