रुद्रपुर। पुलिस ने सेना में अग्निवीर बनाने का झांसा देकर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को सेना का सूबेदार बताता था और झांसे में आए युवाओं से एडवांस लेने के साथ ही शैक्षिक अभिलेख भी जमा करा लेता था। उसके कब्जे से सेना का फर्जी आईकार्ड, साथ ही पांच युवाओं के शैक्षिक अभिलेख सहित अन्य सामान बरामद हुआ है। मामले में पुलिस दो आरोपियों को पहले ही जेल भेज चुकी है। एसएसपी में मुख्य आरोपी को पकड़ने वाली टीम को ढाई हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
शनिवार को एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि तीन नवंबर 2022 को नानकमत्ता निवासी तपस मंडल ने दिनेशपुर थाने में विक्की मंडल निवासी वार्ड नंबर एक देवनगर शक्तिफार्म और पंकज सिंह बडेला निवासी मछियाड़ थाना रीठा साहिब चंपावत के खिलाफ तहरीर दी थी। उसका कहना था कि दोनों ने उसे और कुछ अन्य युवकों को सेना में अग्निवीर योजना में भर्ती कराने का झांसा देकर 50,000-50,000 रुपये और वास्तविक शैक्षिक प्रमाण पत्र लिए थे। भर्ती नहीं होने पर जब उसने रुपये और प्रमाणपत्र वापस मांगें तो उसे दिनेशपुर बुलाकर मारपीट करने के साथ ही तमंचा दिखाकर धमकाया गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को 43 हजार रुपये और तमंचे के साथ गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया था।
इनमें एक आरोपी विक्की 144 प्रादेशिक आर्मी जाट रेजीमेंट में तैनात था। गिरोह का मास्टरमाइंड सूबेदार गोविंद सिंह नयाल फरार चल रहा था। एसओ अनिल उपाध्याय की अगुवाई में टीम ने गोविंद की तलाश में रानीखेत, अल्मोड़ा, चंपावत और बरेली में दबिशें दी थीं लेकिन शातिर हत्थे नहीं चढ़ा था। शुक्रवार की रात हल्द्वानी में ब्रजलाल अस्पताल के पास से गोविंद सिंह नयाल निवासी नाई गांव, शहरफाटक मुक्तेश्वर को उसकी कार के साथ गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह सेना में सूबेदार नहीं है बल्कि कंप्यूटर इंजीनियर है। उसने दस साल सिडकुल की एक कंप्यूटर निर्माता कंपनी में नौकरी की है। जल्दी अमीर बनने की चाहत में उसने यह फर्जीवाड़ा किया था। एसएसपी ने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है।
गले में पहना था आर्मी का सेना पहचान पत्र, कार पर लिखवाया था डिफेंस
रुद्रपुर। गोविंद बेहद शातिर है। जब पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया तो उसने गले में सेना का फर्जी पहचान पत्र लटकाया था। उसने कार में अगले और पिछले हिस्से में डिफेंस लिखा स्टीकर लगाया हुआ था। एसएसपी ने बताया कि गोविंद के कब्जे से पांच युवकों के मूल और पांच युवकों के फोटो स्टेट शैक्षिक दस्तावेज, आठ युवकों के अग्निवीर मुख्य परीक्षा के प्रवेश पत्र, दो युवकों के अग्निवीर के मेडिकल रेफरल कार्ड, युवकों से भर्ती कराने के नाम पर लिए गए विभिन्न बैंकों के 40 लाख 95 हजार रुपयों के चेक, डायरी, दो मोबाइल, आर्मी का लिक्वर कार्ड, बैंकों के 12 क्रेडिट कार्ड के साथ ही आधार कार्ड और पेन कार्ड बरामद हुए हैं।
मेहनत से भर्ती हुए युवकों से लेता था ज्यादा रुपये
रुद्रपुर। एसएसपी ने बताया कि आरोपी युवाओं का भरोसा जीतने के लिए खुद को सूबेदार बताता था और अपने साथी विक्की और पंकज के साथ मिलकर झांसे में आने वाले युवकों से शैक्षिक दस्तावेज और एडवांस में चेक लेकर रख लेता था। जो युवक भर्ती होने से रह जाते थे, उनको अगली भर्ती में भर्ती कराने का आश्वासन देता था। जो युवक भर्ती होते थे, उनके तय रकम से अधिक लेता था। इसके बाद ही शैक्षिक दस्तावेज देता था। उसका सेना में कोई ताल्लुक नहीं था। लेकिन वह इतना शातिर है कि झांसे में आने के बाद अपनी मेहनत से भर्ती हुए युवकों से ज्यादा पैसे वसूल लेता था।
रानीखेत में किराए पर रहता था
रुद्रपुर। बेरोजगार युवकों से भर्ती कराने के नाम पर वसूले रुपयों से गोविंद ऐश की जिंदगी जीता था। उसने रानीखेत में किराए का मकान .लिया था और अपने लिए खाना बनाने के लिए 15 हजार रुपये की तनख्वाह पर कुक रखा था। वह युवकों से महंगे होटल में मिलता था। इस दौरान अपने साथ दो युवकों को रखता था ताकि बेरोजगारों को उसके सूबेदार होने पर शक न हो।
फर्जी सूबेदार को तलाशने पुलिस के छूटे पसीने
रुद्रपुर। नवंबर 2022 में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार दो आरोपियों से मिली जानकारी के बाद सूबेदार गोविंद की तलाश शुरू की थी। गोविंद के कुमाऊं रेजीमेंट के रानीखेत भर्ती सेंटर में सूबेदार होने की जानकारी पर पुलिस ने वहां पत्राचार भी किया था, लेकिन वहां से गोविंद नाम का कोई सुबेदार नहीं होने का जवाब आया था। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन भी बदलता रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी ने 100 से अधिक युवकों के साथ ठगी की है।