काशीपुर। मृतक साहिब आलम का परिवार पहले ही खराब आर्थिक स्थिति से जूझ रहा था, इसी दौरान परिवार को जवान बेटे के जाने का गहरा सदमा लगा है। बेटे की मौत से माता-पिता दोनों बदहवास हैं और परिजन विलाप कर रहे हैं। जिस बेटे को पिता की बुढ़ापे की लाठी बनना था वह अचानक ऐसे साथ छोड़ कर चला जाएगा यह किसी ने नहीं सोचा था। साहिब के अचानक जाने से सुनहरे सपने संजो रहे माता-पिता व भाई-बहन को गहरा अघात पहुंचा है।
परिजनों ने बताया कि साहिब के पिता सगीर अहमद खेती किसानी कर किसी तरह जीवन यापन करते हैं। उसकी माता नूरबानो गृहिणी हैं। माता-पिता ने किसी तरह साहिब को स्नातक तक पढ़ाया था। उम्मीद थी कि बेटा पढ़ लिख गया है, अब माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी बनेगा। परिवार वाले उसकी शादी की सोच रहे थे कि इसी बीच उन्हें इस बड़े आघात से जूझना पड़ा। साहिब भाइयों में सबसे बड़ा था। उसके दो छोटे भाई वसीम और अयान हैं। दोनों पढ़ाई कर रहे हैं। बहन तरन्नुम भी इस समय शिक्षा ग्रहण कर रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति को ढर्रे पर लाने के लिए साहिब और वसीम ने गांव बरखेड़ा पांडे में ही सीएससी सेंटर शुरू किया था, जिससे बहुत ज्यादा आमदनी नहीं थी, लेकिन किसी तरह खर्च चल रहा था। साहिब के साथ में वसीम सीएससी सेंटर पर बैठा करता था। परिजनों ने बताया कि इस समय आधार कार्ड की नई आईडी जनरेट करने में कुछ दिक्कत आ रही थी, जिसको लेकर बीते 3 दिन से साहिब कोटाबाग जाया करता था। रोज ही की तरह मंगलवार सुबह वह बाइक पर घर से निकला और फिर वापस नहीं आया। आई तो बस हादसे की मनहूस खबर।