काशीपुर। उत्तराखंड पीएचडी चैंबर की गोष्ठी में केंद्र सरकार द्वारा घोषित पांच कॉरिडोर में से तराई से गुजरने वाले कॉरिडोर को कृषि कॉरिडोर घोषित करने की पैरवी की गई। गोष्ठी के संयोजक राजीव घई ने बताया कि पंजाब से पश्चिम बंगाल जाने वाला कॉरिडोर ऊधमसिंह नगर से होकर गुजरेगा। कृषि कॉरिडोर घोषित होने से तराई में हरित क्रांति आएगी। उत्तराखंड पीएचडी के निदेशक अनिल तनेजा ने बताया कि पंतनगर में अंतरराष्ट्रीय हॉटी-एग्री एक्स आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बायो टेक्नोलॉजी को अगली क्रांति का दर्जा दिया। जितेंद्र संगल ने कहा कि पहाड़ों में पीरुल (चीड़ की पत्ती) जलकर खत्म हो जाता है। जबकि हर इंडस्ट्री दस हजार टन पिरुल ईंधन बनाने के लिए खरीद सकती है। लेकिन इसकी ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और उद्योग बिजली संकट से जूझ रहे हैं। योगेश जिंदल ने कहा कि गाय के एक किलो गोबर से तीस किलो खाद तैयार होती है। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। उन्होंने कृषि के अलावा पशुधन को भी बढ़ावा देने का सुझाव दिया। सुमित लखोटिया ने बुनियादी उत्पादों के बढ़ावे की बात कही। पवन अग्रवाल ने कहा कि आज राज्य की सड़कें बिहार से भी खराब हैं। अग्रवाल ने कहा कि हम चीन से टक्कर की बात करते हैं। लेकिन हमारे यहां काशीपुर से चेन्नई कागज भेजने के लिए पांच रुपए प्रति किलो भाड़ा देना पड़ता है। यही दूरी 85 पैसे प्रति किलो के खर्च पर चीन में तय की जाती है। भारत में 15 टन माल भेजने की इजाजत है लेकिन चीन में एक साथ 90 टन माल भेजा जा सकता है। इसका सीधा कारण सड़क जैसी बुनियादी जैसी सुविधाओं का अभाव है।