रुद्रपुर। दीपों का पर्व दीपावली नजदीक हो और दिए की बात न हो, ऐसा हो नहीं सकता। कहते हैं कि लक्ष्मी की पूजा के लिए मिट्टी के दिए जरूरी हैं। लेकिन यह अब बीते जमाने की बात लगने लगी है। कुछ ही लोग मिट्टी के दियों की कद्र करते हुए उनकी खरीददारी करते हैं। इससे मिट्टी के दिए से जुड़े कारोबारी बेहद परेशान हैं। कई कारीगरों नेे तो दिए बनाने से ही छोड़ दिए हैं। अब वे रामपुर, बरेली से दिए मंगवा रहे हैं। पिछले साल की तरह ही इस बार भी छोटे दिए पांच रुपये दर्जन और बड़े दिए पांच के दो बेचे जा रहे हैं। गेंदन लाल ने बताया कि मिट्टी के दिए शुद्ध माने जाते हैं, पहले खूब बिक्री होती थी। लेकिन अब नई पीढ़ी इन्हें खरीदने से कतरा रही है। वहीं आदर्श कालोनी में मिट्टी से मंदिर बनाने वाले गिरिराज ने तो आकर्षक मंदिर बनाए हैं और उनकी कीमत भी मामूली (20-40 रु) है। लेकिन उन्हें भी ग्राहकों का इंतजार है। बताया कि पहले वे चाक के सहारे घर पर ही दिए बनाते थे, लेकिन अब लोगों की बेरुखी को देखते हुए दिए बनाना ही छोड़ दिया है।