रुद्रपुर। लोकसभा चुनाव में पड़े 7.54 प्रतिशत कम मतदान ने राजनीतिक दलों को टेंशन दे दी है। अभी तक लोकसभा चुनाव 2014 व 19 में लगभग 72 प्रतिशत के आसपास मतदान का ट्रेंड रहा है। इस बार घटे मतदान प्रतिशत ने सभी चुनावी विश्लेषकों को भी साेचने पर मजबूर कर दिया है। मतदान बीतने के बाद दूसरे दिन राजनीति दलों से जुड़े लोगों में कम मतदान से सियासी फायदे नुकसान की चर्चा होती रही।
लोकसभा चुनाव 2014 में ऊधमसिंह नगर में 71.73 प्रतिशत वोट पड़े थे। यही ट्रेंड अगले 2019 लोकसभा चुनाव में भी बना रहा। जिले में कुल 72.12 प्रतिशत वोट बरसे थे। इस बार चुनाव में बढ़े मतदान को लेकर जहां राजनीतिक दल भी आश्वस्त थे, वहीं आयोग भी 85 प्रतिशत वोटिंग का लक्ष्य लेकर चल रहा था।
लोकसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होते ही पूरे जिले में व्यापक स्तर पर मतदान बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए गए। इधर शुक्रवार को जब मतदान शुरू हुआ तो मतदाताओं में खासा उत्साह नहीं दिखा। गिने-चुने बूथों को छोड़ दें तो अन्य बूथों पर लाइन कम ही दिखी। लोग आसानी से आते गए और मतदान चलता रहा। शाम को जब आंकड़े आए तो पिछली बार के अपेक्षा कम मतदान हुआ मिला।
अब ऐसे में भाजपा, कांग्रेस, बसपा सहित सभी 10 प्रत्याशियों का भाग्य तो ईवीएम में कैद हो गया है पर कम मतदान ने राजनीतिक पंडितों के समक्ष एक प्रश्न छोड़ दिया है। आखिर लगभग साढ़े सात प्रतिशत कम मतदान के मायने क्या हैं।
दिनभर दुकानों से लगातर राजनीति दलों से जुड़े लोग इसी पर बहस करते दिखे। जिले में हुए कम मतदान ने राजनीतिक दलों के लोगों पर शिकन ला दी है। संवाद