शक्तिफार्म। उतरते पानी के साथ बैगुल नदी के आसपास बसे गांवों और खेतों में बर्बादी के निशान नजर आने लगे। करीब 250 घरों को नुकसान पहुंचा है, जबकि दर्जन भर कच्चे घर अब रहने लायक नहीं रहे। मंगलवार रात बैगुल नदी के उफान पर आने से अरविंदनगर ग्रामसभा के नंबर सात, आठ व नौ नंबर गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए थे। इस वजह से करीब 250 परिवारों को देर रात मजबूरन अपना घर बार छोड़कर राहत शिविर या रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ी। बृहस्पतिवार को नौ नंबर और आठ नंबर गांव के करीब 100 घरों से पानी उतरने पर लोग शिविरों से लौटे और अपने आशियाने में जमा कीचड़ और मलबे को साफ करने में जुट गए। 150 घर दूसरे दिन भी जलमग्न हैं। आफत के पानी से घर, खेत, जानवर पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुके हैं। राजस्व विभाग की टीम जलभराव से हुए नुकसान का आकलन लगाने में जुटी है। ताकि पीड़ितों को जायज मुआवजा दिया जा सके।
चार राहत शिविरों में 600 लोग ने ली है पनाह
शक्तिफार्म। क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी डीएस धामी ने बताया कि नौ नंबर के काली मंदिर, प्राथमिक विद्यालय झाड़ी नंबर नौ, प्राथमिक विद्यालय झाड़ी और प्राथमिक विद्यालय झाड़ी मंदिर में बनाए गए राहत शिविरों में करीब 600 बाढ़ पीड़ित रह रहे हैं। उनके नाश्ते और खाने की समुचित व्यवस्था की जा रही है। जो लोग घरों को लौट गए हैं और उनके घरों में रखा अनाज नष्ट हो गया है तो ऐसे परिवारों को राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। संवाद
मवेशियों के चारे का संकट गहराया
शक्तिफार्म। ग्रामसभा अरविंदनगर में जलभराव से पशुओं के चारे के लिए इस्तेमाल होने वाले धान की परली पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। जंगल में चार से पांच फुट तक पानी जमा होने से अब पशुओं के चारे का संकट गहरा गया है। ग्रामीणों ने बताया कि घरों में पानी भर जाने के कारण पाली गईं बकरियां और गायों को छोड़ दिया था। जिनका अभी अता-पता नहीं है। संवाद