ब्लाक मुख्यालय में श्रवण लीला के साथ रामलीला का शुभारंभ किया गया है। पहले दिन श्रवण कुमार की लीला का मंचन किया गया, जिसमें श्रवण कुमार अपने अंधे माता- पिता को तीर्थयात्रा पर ले गए। रास्ते में माता-पिता को प्यास लगने पर श्रवण नदी में पानी लेने गए। इस बीच जंगल में शिकार पर गए राजा दशरथ ने पानी से भर रहे घड़े की आवाज को किसी जानवर की आवाज समझकर शब्दभेदी वाण छोड़ दिया। जो सीधे श्रवण के सीने में लग गया और घायल होकर वहां गिर पड़े। जब राजा दशरथ वहां पहुंचे, तो घायल पड़े श्रवण ने उन्हें सब कुछ बता दिया। उसके बाद राजा पानी लेकर श्रवण के माता-पिता के पास गए। जब अंधे माता-पिता ने श्रवण की मौत की खबर सुनी, तो वह विलाप करने लगे। उन्होंने राजा दशरथ को श्राप दिया कि जिस प्रकार हम अपने पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग रहे हैं, उसी तरह आप भी पुत्र वियोग में तड़प कर मरोगे। इस दृश्य को देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। इससे पहले रामलीला समिति के अध्यक्ष गजेंद्र असवाल ने सभी दर्शकों से कोरोना महामारी में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मास्क पहनने की अपील की है।