2002-03 में पुरानी टिहरी से पिपली और केमसारी टिनशेड कालोनी में शिफ्ट किए बांध प्रभावितों को 20 साल बाद भी मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। प्रभावितों को अस्थायी रूप से जो छत आवंटित की गई थी वह भी अब टपकने लगी है। स्थायी आवंटन नहीं होने के कारण लोग जर्जर हुए कमरों की मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं।
टिहरी बांध की सुरंग टी-1 और टी-2 वर्ष 2001 में बंद करने के बाद पुरानी टिहरी शहर में ठेली-फड़ और जिन लोगों का पुनर्वास नहीं हो पाया था ऐसे करीब 245 परिवारों को पिपली और केमसारी टिनशेड कालोनी में एक-एक कमरे अस्थायी रूप से आवंटित कर शिफ्ट किया गया था। उसके बाद से लोग लगातार आवंटित कमरे को स्थायी आवंटन कर मालिकाना हक देने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन 20 साल बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। लंबा समय बीतने पर अब टिन भी सड़ने लगी है जिससे बरसात में उनको टपकती छत के नीचे रहना पड़ता है। सीवर लाइन का भी ठीक से रखरखाव नहीं होने से लोग बदबू से परेशान हैं। बांध प्रभावित लगातार स्थायी आवंटन की मांग करते आ रहे हैं लेकिन पुनर्वास निदेशालय इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
केमसारी टिनशेड कॉलोनी में अस्थायी रूप से आवंटित एक कमरे में परिवार रखना काफी मुश्किल हो रहा है। कभी कोई मेहमान आ गया तो दूसरे के घर में शरण लेनी पड़ती है। सीवर लाइन की मरम्मत नहीं होने से भी लोग काफी परेशान हैं। -सुरेंद्र घई, टिनशेड कालोनी निवासी।
वर्ष 2002 में आवंटित कॉलोनी की टिन सड़ने लगी है। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता है। स्थायी आवंटन किया जाता तो उसकी मरम्मत करने के साथ ही नया भी बना सकते थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने से मजबूरी में रहना पड़ रहा है। - आंचल, टिनशेड निवासी केमसारी।
टिनशेड कॉलोनी में रह रहे लोगों की समस्या का समाधान मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर किया जाना चाहिए। सीएम से मिलकर इसका समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। वे लोग मेरे पास या फिर पार्षद के पास अपने आवेदन दे सकते हैं। -किशोर उपाध्याय, विधायक, टिहरी विधानसभा।
टिनशेड का मामला लंबे समय से लटका हुआ है। इसका समाधान नगर पालिका के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए पत्रावली नगर पालिका को दी गई है। भूखंड आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया निपटाने के बाद पुनर्वास निदेशालय उसके निस्तारण की कार्रवाई शुरू करेगा। - डा. सौरभ गहरवार, डीएम व पुनर्वास निदेशक टिहरी।