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415 परिवारों का 12 साल बाद भी नहीं हुआ पुनर्वास

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टिहरी बांध प्रभावित 415 परिवारों का पुनर्वास का इंतजार 12 साल बाद भी खत्म नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार ने जनवरी 2021 में प्रभावित परिवारों का पुनर्वास करने का निर्णय लिया था लेकिन डेढ़ साल से पुनर्वास संबंधी प्रक्रिया टीएचडीसी और पुनर्वास निदेशालय के बीच हो रहे पत्राचार में उलझ कर रह गई है। पुनर्वास नहीं होने से प्रभावितों को जर्जर मकानों में ही जीवन यापन करना पड़ रहा है।
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वर्ष 2010 में टिहरी बांध की झील का जलस्तर बढ़ने के कारण भागीरथी और भिलंगना घाटी के 17 गांव खतरे की जद में आ गए थे। सरकार ने 2011 में उच्चस्तरीय विशेषज्ञ कमेटी बनाकर प्रभावित गांवों का सर्वे करवाया था। सर्वे में 415 परिवारों के घर खतरे की जद में पाए गए थे। कमेटी ने चिह्नित परिवारों के पुनर्वास की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट 2012 में राज्य सरकार को दी थी। तब से बांध प्रभावित पुनर्वास की मांग को लेकर संघर्षरत हैं।
जनवरी 2021 में सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज की पहल पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह की अध्यक्षता में दिल्ली में टीएचडीसी, पुनर्वास से लेकर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की बैठक हुई थी। बैठक में रौलाकोट के प्रभावितों को भूमि और अन्य गांव के लोगों को 74-74 लाख नकद मुआवजा दिए जाने का निर्णय लिया गया। निर्णय के डेढ़ साल में भी पात्र परिवारों का पुनर्वास नहीं हो पाया है।
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अभी तक केवल नंदगांव के 24 परिवारों को नकद भुगतान के रूप में पहली किश्त दी गई जबकि रौलाकोट के 113 परिवारों को लॉटरी के माध्यम से भूमि आवंटित की गई। रौलाकोट के जिन परिवारों को भूमि आवंटित की गई है उन्हें अभी तक कब्जा भी नहीं मिल पाया है। जबकि खांड, गडोली, भटकंडा, उठड़ समेत अन्य गांव के 278 परिवारों को नकद मुआवजा भुगतान को कार्रवाई नहीं हो पाई।
भटकांडा(लुणेटा) में झील के कारण 25 परिवार खतरे में हैं। अब तक तीन परिवारों के मकान टूट गए हैं। जैसे-जैसे झील का जलस्तर बढ़ रहा है वैसे-वैसे प्रभावितों की मुश्किलें भी बढ़ रही है।
-प्रदीप भट्ट, निवासी भटकंडा।
उठड़ के 29 परिवार झील से हो रहे भूधंसाव से प्रभावित है लेकिन पुनर्वास निदेशालय केवल 17 परिवारों को ही प्रभावित मान रहा है। अन्य 12 परिवार भी खतरे में हैं। ऐसे में इन परिवारों की भी पात्रता निर्धारित की जानी चाहिए।
-सुमन सिंह रावत, निवासी उठड़।
रौलाकोट के प्रभावितों को भूमि आवंटित कर दी गई है जबकि नंदगांव के 24 परिवारों को नकद भुगतान की पहली किश्त दी गई है। सिल्ला, खांड, गडोली आदि गांव को प्रतिकर भुगतान के लिए प्रस्ताव टीएचडीसी को भेजा गया है।
-धीरेंद्र सिंह नेगी, ईई, अवस्थापना खंड पुनर्वास टिहरी।
नंदगांव के परिवारों के भुगतान के लिए पुनर्वास निदेशालय को बजट दिया गया है। पुनर्वास निदेशालय ने जिन गांव के लिए बजट मांगा है। उसका प्रस्ताव हेड आफिस भेजा गया है। स्वीकृति मिलते हुए धनराशि जारी की जाएगी।
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-यूके सक्सेना, अधिशासी निदेशक टीएचडीसी इंडिया।
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