नरेंद्रनगर (टिहरी)। रामलीला के सातवें दिन बाली, सुग्रीव युद्ध और राम-सुग्रीव मिलन के दृश्य का मंचन किया गया। राम, लक्ष्मण को किष्किंधा पर्वत की ओर आते देख सुग्रीव हनुमान को राम-लक्ष्मण के पास भेजते हैं। बाली के अत्याचारों से पीड़ित सुग्रीव राम को अपनी व्यथा सुनाते हैं। राम, सुग्रीव को बाली से युद्ध करने भेजते हैं, दोनों का युद्ध होता है। पहली बार सुग्रीव बाली से हार जाता है। दूसरी बार युद्ध में राम बाली का वध कर देते हैं। राम सीता का पता लगाने के लिए लक्ष्मण को पंपापुर भेजते हैं। लक्ष्मण वानर राज सुग्रीव से सीता का पता लगाने को कहते हैं। जामवंत हनुमान सहित सारी वानर सेना समुद्र किनारे एकत्र होते हैं पवन पुत्र हनुमान को उनका बल याद दिलाते हैं। हनुमान राम का स्मरण करके अपने वास्तविक बल का आभास करते हुए समुद्र पार कर लंका की ओर प्रस्थान करते हैं। इस मौके पर पालिका अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम पंवार, रामलीला समिति के अध्यक्ष सूरत थपलियाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष राजेंद्र सिंह राणा, राजपाल पुंडीर, बसंती नेगी, आशा टम्टा, मनवीर नेगी, जयपाल नेगी, राजवीर पुंडीर, विजेंद्र बिजल्वान, विकास नेगी, शैलेंद्र नौटियाल, धूम सिंह नेगी, पवन आदि मौजूद थे।