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वनाग्नि सुरक्षा में वन सरपंचों की भूमिका अहम

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कंडीसौड़ (टिहरी)। वन पंचायत सरपंचों को वनाग्नि सुरक्षा और जल स्रोत संवर्द्धन की विस्तृत जानकारी दी गई। टिहरी डैम वन प्रभाग-द्वितीय के सहयोग से आयोजित बैठक में वन पंचायत संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एनएस तोमर ने कहा कि वनाग्नि सुरक्षा में वन पंचायतों की अहम भूमिका है। वन पंचायतों की सक्रियता के साथ ही जन सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में चीड़ वनों का सबसे बड़ा दुश्मन है। प्रदेश में गर्मियों के मौसम में जंगलों में कई बार पीरूल गिरता है, जिससे वनाग्नि की संभावनाएं भी बनी रहती है। वन सरपंच विनोद प्रकाश थपलियाल ने कहा की जंगल बचाने में सरपंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वन पंचायतों को कोई सम्मान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कैंपा के अंतर्गत होने वाले कार्यों की धनराशि वन पंचायतों को उपलब्ध कराने की मांग की। बैठक में रेंज अधिकारी प्रमोद डोबरियाल, जयेंद्र सिंह पडियार, बेल सिंह चौहान, वीपी थपलियाल और बचन सिंह पंवार आदि मौजूद थे। ब्यूरो
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