प्रवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए फेसबुक के जरिए योजनाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान उनकी सभी शंकाओं को भी दूर किया गया।
एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना में जिला थैमेटिक विशेषज्ञ भावना पंवार ने बताया कि ग्राम स्तर पर युवा समूह के रूप में सब्जी उत्पादन, जड़ी-बूटी व मसाला उत्पादन, चायपत्ती उत्पादन कर सकते हैं। साथ ही हस्तशिल्प व काष्ठ शिल्प को अपनी आर्थिकी का जरिया बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि पहाड़ी भोज्य पदार्थों, अनाजों, फल व कलेऊ को भी अपनी आजीविका से जोड़कर बाजार तक पहुंचा सकते हैं। इस मौके पर कई प्रवासियों ने तैयार उत्पादों को बाजार मुहैया कराने, कच्चा माल मुहैया कराने समेत अन्य समस्याओं को लेकर सवाल पूछे, जिनका थैमेटिक विशेषज्ञ ने जवाब दिया। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार के इच्छुक प्रवासियों के साथ पुन: बैठक व कार्यशाला की जाएगी।