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पांडव नृत्य में हुआ गैंडा कौथिग का मंचन

देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 24 Dec 2019 10:27 PM IST
ऊखीमठ के भटवाड़ी गांव में पांडव नृत्य के तहत गैंडा कौथिग का हुआ मंचन।
ऊखीमठ के भटवाड़ी गांव में पांडव नृत्य के तहत गैंडा कौथिग का हुआ मंचन। - फोटो : RUDRAPRYAG
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भटवाड़ी गांव में पांडव नृत्य के तहत गैंडा कौथिग का मंचन किया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं की खूब भीड़ जुट रही। आज, पांडव गंगा स्नान कर कैलाश यात्रा के लिए प्रस्थान करेंगे।
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बीते 8 दिसंबर से शुरू हुए पांडव नृत्य में मंगलवार को पांडवों ने पंडवाणी गायन और ढोल-दमाऊं की थाप पर नृत्य किया। इस मौके पर गैंडा वध कौथिक का मंचन किया गया। मान्यता है कि पांडवों को महाभारत युद्ध में पितृ दोष हो जाता है। इस दोष से बचने के लिए कुल पुरोहित उन्हें सलाह देते हैं कि वह गैंडे की खगोती से अपने पितृों को तर्पण दें। धरती लोक पर गैंडा नहीं मिलने पर अजुर्न द्रोपदी के साथ पाताल में जाते हैं। जहां वह गैंडा को मार देते हैं। इस दौरान वहां, मौजूद नागार्जुन क्रोधित होकर अर्जुन को मूर्छित कर देते हैं। इस मौके पर भटवाड़ी, ऊखीमठ, डंगवाणी, ब्राह्मखोली, चुन्नी, मंगोली समेत केदारघाटी के गांवों से पहुंचे सैकड़ों भक्तों ने पांडवों के दर्शन कर आशीर्वाद भी लिया। समिति के अध्यक्ष कुंवर सिंह रावत ने बताया कि 28 दिसंबर को हाथी कौथिग के साथ पांडव नृत्य का समापन होगा। इस मौके पर हर्ष जमलोकी, प्रकाश रावत, दिनेश तिवारी, जगमोहन पंवार, जय प्रकाश, राकेश तिवारी, संरक्षक बीरेंद्र रावत, टीपी त्रिवेदी, देवेंद्र त्रिवेदी, उमेंद्र रावत, लक्षपत पंवार आदि मौजूद थे।
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