केदारनाथ यात्रा में बढ़ती भीड़ से पैदल मार्ग व केदारपुरी में दुर्लभ जीव व वनस्पतियों के लिए खतरा पैदा हो रहा है। यहां की बुग्याली मिट्टी परत को जिस तरह से क्षति पहुंच रही है, वह प्रकृति और पर्यावरण के लिए शुभ नहीं है।
गौरीकुंड-केदारनाथ 16 किमी पैदल मार्ग पर, जैसे-जैसे श्रद्धालु आगे बढ़ता है, उसे प्रकृति की नेमतों के दर्शन होने लगते हैं। रामबाड़ा से लिनचोली तक सघन वन क्षेत्र और लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट तक हल्का बुग्याली क्षेत्र है। यहां सुबह से लेकर शाम तक पक्षियों की चहचहाट कानों में गूंजती रहती है। इसके अलावा क्षेत्र में कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, हिमालयन ब्राउन बियर, थार, ब्लैक बियर मौजूद हैं। राज्य पक्षी मोनाल सहित पक्षियों की 23 प्रजातियां यहां मौजूद हैं। यहां जड़ी-बूटियों व वनस्पति का भंडार भी है।
केदारनाथ में मशीनों और हेलीकॉप्टर के शोर और घोड़ा-खच्चरों की आवाजाही और उनकी लीद व मूत्र से भी परिवेश प्रभावित हो रहा है।