नमामि गंगे परियोजना में अलकनंदा नदी किनारे करोड़ों की लागत से बना घाट बदहाल पड़ा है। बरसात में जलमग्न रहा घाट अब रेत, बजरी और लकड़ियों के ढेर से पटा है। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। अगस्त्यमुनि, तिलवाड़ा, घोलतीर व रुद्रप्रयाग में आठ घाटों का निर्माण किया गया। एक घाट बनाने में डेढ़ से सवा दो करोड़ तक की धनराशि खर्च की गई, लेकिन निर्माण के बाद से इन्हें भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। उक्रांद के केंद्रीय महामंत्री देवेंद्र चमोली, जन अधिकार मंच के जिलाध्यक्ष मोहित डिमरी, महामंत्री अशोक चौधरी, पूर्व पालिकाध्यक्ष रेखा सेमवाल ने जिला प्रशासन व नगर पालिका से रेत से पटे घाट की सफाई कर संरक्षण की मांग की है। अधिशासी अधिकारी नपा रुद्रप्रयाग सीमा रावत का कहना है कि नमामि गंगे परियोजना में जिला मुख्यालय में नदी किनारे निर्मित घाटों की संरक्षण व साफ-सफाई के लिए अतिरिक्त बजट को प्रावधान नहीं किया गया है। नपा के पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। बावजूद हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं घाट को दुरुस्त कर उसका उपयोग किया जाए।