पर्यावरणविद् डा. त्रिलोक चंद्र सोनी का कहना है कि वनाग्नि को रोकने के लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। कहा कि जंगलों में लगी आग से पहाड़ धधक रहे हैं और वातावरण दूषित हो रहा है, जो मानव व मवेशियों के लिए शुभ नहीं है। कहा कि अगर, समस्या का जल्द उचित निस्तारण नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं, जब लोगों को आम जीवन में सांस, आंख व त्वचा की बीमारी होगी। यही नहीं, तपिश से अगले दस वर्षों में अस्सी फीसदी जलस्रोत सूख जाएंगे। इसका सीधा असर प्रकृति और पर्यावरण पर पड़ेगा। डॉ. सोनी ने जंगलों को आग से बचाने के लिए ग्राम पंचायत व वन पंचायतों को जिम्मेदारी देने की पैरवी की है। उन्होंने जंगलों में सीसीटीवी कैमरा लगाने की बात कही है, जिससे अराजक तत्वों, तस्करों व शिकारियों पर नजर रखी जा सके। उन्होंने वनाग्नि को मानव जनित आपदा बताते हुए रोक के लिए आमजन से आगे आने का आह्वान किया है। संवाद