फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

1600 ईसवी के बाद पहली बार अटरिया मंदिर के कपाट हुए बंद

विज्ञापन
रुद्रपुर के अटरिया मंदिर में लगाया गया ताला। - फोटो : AMAR UJALA
विज्ञापन
रुद्रपुर। कोरोना वायरस की रोकथाम व बचाव को देखते हुए प्राचीन अटरिया माता शक्तिपीठ के कपाट पहली बार 1600 ईसवी के बाद नवरात्रि में वर्ष 2020 में महामारी के चलते बंद कर दिए गए। बताया जाता है कि मंदिर का इतिहास 200 ईसवी पूर्व का है। मुगलों के शासनकाल में मंदिर को क्षतिग्रस्त कर इसकी मूर्तियां कुएं में डाल दी गई थी। 1600 इसवी में राजा रूद्र प्रताप सिंह ने कुएं बसे मूर्ति को निकालकर उसी स्थान में (जगतपुरा) मां अटरिया माता की मूर्तियों की स्थापना की। उसके बाद से लगातार नवरात्रि की अष्टमी से अटरिया मंदिर में पूजा अर्चना और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर के पुजारी पंडित पंकज गौड़ ने बताया कि महामारी के चलते वर्ष 2020 में पहली बार मंदिर के कपाट में ताला लगाया गया। इससे भक्तों को काफी निराशा हुई है। इंसेट- सोशल मीडिया के माध्यम से भक्तों को कराए माता के दर्शन रुद्रपुर। पुजारी पंकज गौड़ ने भक्तों को सोशल मीडिया के माध्यम से नवरात्रि के दिन अटरिया माता के साथ सभी देवी देवताओं को नए वस्त्र व सिंगार कर दर्शन कराए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें