आशा कार्यकर्ताओं ने मानदेय, लॉकडाउन भत्ता और कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग की है। कहना है कि वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दौर में आशा कार्यकर्ता कस्बों से लेकर गांवों में पूरी तत्परता से कार्य कर रही हैं। निगरानी समिति में रहते हुए गांवों में होम क्वारंटीन में रह रहे लोगों की निगरानी के साथ ही अन्य जरूरी कार्य किए जा रहे हैं। बावजूद, शासन द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है। यहां तक कि उन्हें लॉकडाउन में कोई भत्ता भी नहीं दिया गया, जिस कारण वे अपने संसाधनों में काम करने को विवश हैं। आशा संगठन ने चंपावत में 264 आशा कार्यकर्ताओं को सीएमओ द्वारा बर्खास्त करने की कड़ी निंदा करने हुए पुन: बहाली की मांग की है। इधर, गढ़वाल विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अंकित उच्छोली ने भी आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी घोषित करते हुए 18000 रुपये वेतन देने, लॉकडाउन भत्ता के साथ अन्य लंबित मांगों पर कार्रवाई के लिए सीएम को ज्ञापन भेजा है। संवाद