सोनप्रयाग में सोनगंगा पर अमेरिकन तकनीक से बने एक्रो पुल को जोड़ने का काम पूरा हो गया है। यात्रा सीजन में पुल से यातायात शुरू कर दिया जाएगा।
उत्तराखंड में बना यह पहला एक्रो पुल है। नौ फरवरी से डीडीएमए (डिस्ट्रिक डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथरिटी) के 25 सदस्यीय टीम ने अमेरिका के इंजीनियर रोलैंड और स्थानीय ईई केएस नेगी के दिशा-निर्देशन में पुल को जोड़ने का काम शुरू किया था। 60 मीटर लंबा और 5 मीटर चौड़े पुल को जोड़ने में 35 दिन का समय लगा। पुल के निर्माण और जोड़ने में करीब 15 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस पुल के बनने से केदारनाथ यात्रा में गौरीकुंड तक नियमित यातायात हो सकेगा। वर्ल्ड बैंक आईसीटी कंपनी के कंसलटेंट कर्नल डीपी नौटियाल (सेवानिवृत्त) का कहना है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में एक्रो पुल सबसे मुफीद हैं।
डीडीएमए के ईई नेगी ने बताया कि आने वाले समय में जिले के अन्य स्थानों पर भी एक्रो पुल को लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। विदित हो कि जून 2013 की आपदा में सोनप्रयाग में व्यापक क्षति हुई थी, जिसमें सोन गंगा पर बना मोटर पुल भी बह गया था। सेना की ओर से यहां पर वैकल्पिक पुल बनाया गया था, लेकिन बीते वर्ष 25/26 जून की तेज बारिश में वह पुल भी ढह गया था। ऐसे में प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक की मदद से अमेरिका में निर्मित एक्रो पुल को सोनप्रयाग में स्थापित करने का निर्णय लिया था।
सोनप्रयाग में बना राज्य का पहला एक्रो पुल रुद्रप्रयाग जनपद के विकास में ऐतिहासिक उपलब्धि है। पुल के एसेंबल करने में जिस तत्परता से काम हुआ है, वह सराहनीय है। यात्राकाल में पुल से यातायात शुरू कर दिया जाएगा।- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग