रुद्रप्रयाग। तीन युगों की धार्मिक मान्यताओं को संजोए शिव-पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण तीर्थाटन से नहीं जुड़ पाया है। मंदिर को सुविधाओं से जोड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे है। वहीं यहां पुजारियों के लिए रहने, भोजन व शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं हैं। ये लोग मंदिर के बरामदे के कक्ष में रहते हैं। आराध्य के लिए बनने वाले भोग से ही स्वयं का गुजारा करते हैं। मंदिर बीकेटीसी के अधीन होने है, लेकिन समिति यहां के पुजारियों को वेतन नहीं देती है। ऐसे में ये लोग, श्रद्धालुओं से मिलने वाली भेंट से गुजारा करते हैं। रविग्राम निवासी मंदिर के पुजारी रामेश्वर प्रसाद जमलोकी, वीपी जमलोकी, शिव प्रसाद जमलोकी, कमल किशोर जमलोकी, सुदर्शन जमलोकी, प्रियधर प्रसाद जमलोकी आदि का कहना है कि सरकारें तीर्थाटन व पर्यटन को बढ़ावा देने की बातें तो कर रही हैं, लेकिन त्रियुगीनारायण की सुध नहीं ली है। ग्राम प्रधान विजय लाल ने बताया कि पूर्व सरकार ने मंदिर को पर्यटन व तीर्थाटन से जोड़ने की घोषणा के साथ ही गांव को मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम घोषित किया गया, लेकिन आज तक एक भी सुविधा नहीं मिल पाई है। इधर, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि त्रियुगीनारायण मंदिर के पुजारी रविग्राम के हक-हकूकधारी है। इसलिए उन्हें वेतन का कोई प्रावधान नहीं है। यात्राकाल में जो भी आर्थिक सहयोग होता है, उसे समिति प्रदान करती है। कहा कि मंदिर में जरूरी सुविधाओं को लेकर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इस संबंध में शासन को भी अवगत कराया गया है।