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पापा, बड़ी बेटी हूं आपकी आपका हाथ बटना मेरी भी जिम्मेदारी है

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गुप्तकाशी। रेल गांव निवासी रेशमा की आगामी नवरात्र में शादी होनी तय थी। उसके माता-पिता शादी की तैयारियों में जुटे थे। घोड़ा-खच्चर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले बृजमोहन की बड़ी बेटी रेशमा ने दो वर्ष पूर्व जीआईसी फाटा से इंटर की परीक्षा पास की थी। गरीबी के चलते वह स्नातक में रेगुलर छात्रा के रूप में प्रवेश नहीं ले पाई तो बीए प्राइवेट कर रही थी। इस दौरान घर में खाने से लेकर मां के साथ खेतीबाड़ी और छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई में भी वह मदद करती थी। बीते एक माह से वह हर रोज सुबह अपनी दो सहेलियों के साथ फाटा में सिलाई सीख रही थी। उसे दोनों छोटे भाई जो क्रमश: 12वीं व 10 वीं में पढ़ रहे हैं और छोटी बहन जो 11वीं में हैं, अपनी दीदी को याद कर रो रहे हैं।
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