जखोली। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी हयात सिंह राणा और बालकृष्ण सेमवाल ने सम्मान पेंशन दिए जाने की मांग की है। कहा कि उन्हें पूर्ववर्ती सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारी घोषित कर सम्मान पेंशन के रूप में 5 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे, लेकिन वर्तमान सरकार के गृह सचिव विनोद शर्मा द्वारा इस पेंशन को बंद कर दिया गया है, जो अनुचित है। राज्यपाल को भेजे पत्र में राणा ने कहा कि वह सेना से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। वर्ष 1994 में उत्तराखंड आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्हें श्रीनगर से गिरफ्तार कर 14 दिन तक सहारनपुर जेल में रखा गया। वह आंदोलन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और गोली लगने से घायल भी हुए थे, तब उन्हें सहारनपुर के राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। 21 अगस्त 2004 को पूर्ववर्ती सरकार द्वारा मुझे राज्य आंदोलनकारी घोषित कर सम्मान पेंशन 5000 रुपये स्वीकृत की गई, जो प्रतिमाह मिलती थी, लेकिन जुलाई 2016 में यह शपथ पत्र लिया गया कि वह प्रदेश सरकार से अन्य किसी प्रकार की पेंशन तो नहीं लेते हैं। इसके बाद बिना किसी सूचना के सम्मान पेंशन को बंद कर दिया गया। उन्होंने प्रदेश सरकार से पुन: पेंशन शुरू किए जाने की मांग की है।