राशन डीलरों के एक फैसले से इस बार रुड़की क्षेत्र के करीब 1.63 लाख लोगों को मिलने वाले सस्ते गल्ले के राशन पर संशय खड़ा हो गया है। इनमें 60 फीसदी ऐसे लोग हैं जो केवल सस्ते गल्ले के राशन पर ही निर्भर रहते हैं। राशन नहीं मिला तो इन लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि अधिकारी दावा कर रहे हैं कि राशन डीलरों से वार्ता कर राशन उठाने की व्यवस्था की जा रही है।
खाद्य पूर्ति विभाग सरकार के माध्यम से गरीब और निचले वर्ग के लोगों के लिए सस्ते राशन की व्यवस्था करता है। यदि रुड़की क्षेत्र की बात करें तो यहां पर करीब 1.63 लोगों के राशन कार्ड बने हैं। इसमें से करीब 13,200 अन्तोदय कार्ड वाले उपभोक्ता हैं। जबकि 84000 सफेद का राशन कार्ड वाले और 66000 पीले कार्डधारक हैं। इनमें से सफेद और अंतोदय कार्ड धारकों को सरकार की ओर से हर महीने निशुल्क गेहूं और चावल दिया जाता है। जबकि पीले कार्डधारकों को सस्ती दरों पर गेहूं और चावल उपलब्ध कराया जाता है। इन सभी कार्डधारकों में से 95 फीसदी लोग हर महीने राशन लेते हैं। जबकि पांच फीसदी ऐसे लोग हैं जो सस्ते गल्ले की दुकानों से राशन नहीं उठाते, लेकिन इस बार यह 95 फीसदी लोग भी डीलरों के यहां से राशन नहीं उठा पाएंगे। दरअसल रुड़की क्षेत्र के साथ ही प्रदेश के डीलर राशन का लाभांश, किराया भत्ता सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। मांग पूरी नहीं होने पर इन डीलरों ने मई महीने का राशन खाद्यान्न से उठाने से मना कर दिया है। ऐसे में यदि यह डीलर सस्ते गल्ले का राशन नहीं उठाते तो उपभोक्ताओं को राशन नहीं बंट पाएगा।
राशन डीलर समय से राशन उठा ले इसको लेकर डीलरों से वार्ता की जा रही है हालांकि अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसके बावजूद प्रयास किया जाएगा कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
-मुकेश पाल, डीएसओ, हरिद्वार