अभी आरोपी जेल में है। पीड़िता की मां ने आरोपी अनिल के भाई, उसकी मां व दो अन्य पर जेल में बंद आरोपी अनिल को लाभ पहुंचाने के लिए उसकी नाबालिग लड़की का अपहरण करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस मामले में पीड़िता की मां का केस दर्ज करने से इनकार कर दिया था। जबकि पुलिस के आला अधिकारी ने भी कोई कार्रवाई नहीं की थी। परेशान होकर पीड़िता की मां ने कोर्ट की शरण ली थी। जिसमें सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने पुलिस को आरोपी सुनील व ऊषा के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे।
घटना के आठ महीने के बाद पुलिस ने पीड़ित लड़की को आरोपी अनिल, उसके भाई सुनील व मां ऊषा के पास से बरामद किया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए थे। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने सरकार की ओर से सात गवाह पेश किए। जबकि बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए।