छात्रसंघ चुनाव में केएल डीएवी पीजी कॉलेज में अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के ऋतिक ने कब्जा कर लिया। उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव और विवि प्रतिनिधि पद पर भी एनएसयूआई समर्थित प्रत्याशियों ने ही विजय हासिल की। एबीवीपी को केवल कोषाध्यक्ष पद से संतोष करना पड़ा। वहीं बीएएसएफ समर्थित प्रत्याशी खाता भी नहीं खोल पाए।
केएल डीएवी पीजी में इस बार 18 प्रत्याशी मैदान में थे। इसमें से छह एबीवीपी, छह एनएसयूआई और छह बीएएसएफ समर्थित थे। शनिवार सुबह आठ बजे कॉलेज में मतदान शुरू हो गया था। 10 बजे तक केवल 196 वोट पड़े। इसके बाद संख्या बढ़ती चली गई। बिना आईडी चेक किए किसी को कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया गया। दोपहर एक बजे मतदान खत्म होते ही मतगणना शुरू कर दी गई।
निर्वाचन अधिकारी डॉ. मेघा जुयाल ने बताया कि तीन बजे मतगणना समाप्त कर विजयी प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई। घोषणा के अनुसार इस बार एनएसयूआई ने पैनल में अध्यक्ष समेत पांच सीटों पर जीत हासिल की। अध्यक्ष पद पद ऋतिक, उपाध्यक्ष पद पर नदीम, महासचिव पद पर वंश पंवार, संयुक्त सचिव पद पर आयुषि और विवि प्रतिनिधि पद पर शिवम सिंह सैनी ने परचम लहराया। कोषाध्यक्ष पद पर एबीवीपी की साधना विजयी रहीं। बीएएसएफ समर्थित एक भी प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर पाया। विजयी प्रत्याशियों ने जुलूस निकालकर छात्रों का आभार जताया।
इस दौरान कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एमपी सिंह, चुनाव कोर कमेटी सदस्य डॉ. मंजुल धीमान, डॉ. पूर्णिमा श्रीवास्तव, डॉ. मिथिलेश, डॉ. तनवीर आलम के अलावा डॉ. अर्शी रस्तोगी, डॉ. पूजा अरोड़ा, डॉ. किरण भारती आदि मौजूद रहे।
वोट डालने में छात्राएं रहीं आगे
कॉलेज में छात्र सुबह आठ बजे आना शुरू हो गए थे और एक बजे तक वोट डालते रहे। कॉलेज में कुछ पंजीकृत छात्र-छात्राओं की संख्या 1328 है। शनिवार को 808 वोट डाले गए। इसमें छात्र वोटर 365 और छात्रा वोटर 443 थीं। ऐसे में छात्राओं की भागीदारी छात्रों की अपेक्षा ज्यादा रही।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
कॉलेज में सुरक्षा के पुख्ता इंतजार किए गए थे। चुनाव शांतिपूर्ण निपटाने और हुड़दंग से बचने के लिए पुलिस जगह-जगह तैनात थी। कॉलेज के मुख्य गेट से पहले सड़क पर दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाकर छात्रों को रोका जा रहा था। यहां सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही भी बंद की हुई थी। इसके बाद कॉलेज के मुख्य गेट पर पुलिसकर्मी तैनात थे जो हर विद्यार्थी की आईडी चेक रहे थे। इसके बाद छात्रों की आईडी सत्यापित करने वाले कक्ष से लेकर मतदान स्थल तक पुलिस की पहरेदारी थी।