मांग पूरी नहीं होने पर अगली महापंचायत अधिकारियों के कार्यालयों पर करने की चेतावनी
उत्तराखंड किसान मोर्चा की एसडीएम चौक पर हुई महापंचायत में किसानों का सबसे ज्यादा गुस्सा चकबंदी, सीपीयू और राजस्व अधिकारियों पर फूटा। किसानों ने सीपीयू को पूरी तरह से हरिद्वार से हटाने की मांग उठाई। प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही किसानों ने लेखपाल और कानूनगो पर अनगिनत आरोप लगाए। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी चार मुख्य वाला ज्ञापन भी सौंपा। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने अगली महापंचायत अधिकारियों के कार्यालयों में करने की चेतावनी दी।
उत्तराखंड किसान मोर्चा के आह्वान पर जिले के विभिन्न गांवों से एक हजार से अधिक ट्रैक्टरों में सवार होकर किसान नगर में दाखिल हुए। रुड़की टाॅकीज से ट्रैक्टर रैली एसडीएम चौक पर पहुंची। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन रोड़ ने कहा कि सरकार और शासन किसान को नजरअंदाज करने लगे हैं। महापंचायत में उमड़ी भीड़ ने बता दिया है कि वह अब शांत नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि किसान घर से खेत के लिए निकलता है तो सीपीयू उनका 10 से 15 हजार का चालान काट देती है। किसी किसान की मजबूरी नहीं समझी जाती। उन्होंने सीपीयू को पूरे जिले से वापस भेजने की मांग की। इसके अलावा चकबंदी विभाग के अधिकारियों पर भी भ्रष्ट होने का आरोप लगाया। उन्होंने इस दौरान भाजपा और कांग्रेस पर विपक्ष पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिले में यदि विपक्ष मजबूत होता तो उन्हें सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस दौरान उन्होंने अपना चार सूत्री ज्ञापन एडीएम प्यारे लाल शाह को सौंपा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो अगली बार ट्रैक्टरों का रैला देहरादून में अधिकारियों के कार्यालय पर कूच करेगा। इस दौरान महापंचायत का संचालन दीपक पुंडीर और अध्यक्षता चौधरी बाबूराम ने की। महापंचायत को धर्मवीर, सुरेंद्र नंबरदार, महकार सिंह, चौधरी आदित्य, राजेंद्र सिंह, पवन त्यागी, संदीप, सरदार जसवीर, अदनाम खान, मोहम्मद आजम, भगत सिंह आदि ने संबोधित किया।
किसानों की ये रही प्रमुख मांगें
- बाढ़ से किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं हैं। प्रशासन दोबारा सर्वे करवाकर किसानों को प्रति बीघा 10 हजार रुपये मुआवजा दे।
- उत्तर-प्रदेश में किसानों के ट्यूबवेल की बिजली एक साल के लिए माफ कर दी है, जबकि प्रदेश में केवल तीन महीने के लिए की गई है। यहां भी बिजली एक साल के लिए मुफ्त की जाए।
- हर बार किसानों को गन्ना मूल्य बढ़ाने का आश्वासन दिया जाता है लेकिन बढ़ाया नही जाता। इस बार किसानों का गन्ना मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
-इकबालपुर चीनी मिल पर किसानों का वर्ष 2017-18 का बकाया जल्द से जल्द ब्याज सहित दिलाया जाए।
पानी की व्यवस्था से किसानों को मिली राहत
उकिमो की महापंचायत में बड़ी संख्या में क्षेत्र का किसान शामिल हुआ था। इसको देखते हुए पदाधिकारियों ने किसानों के पीने के पानी की व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन को दी थी। समय रहते प्रशासन ने पंचायत स्तर पर दो टैंकर पानी के पहले से ही खड़े कर दिए थे। ऐसे में जैसे ही पंचायत स्थल पर किसान पहुंचे तो उन्होंने टैंकरों से पानी पीकर प्यास बुझाई।