रुड़की। संस्कृत भारती उत्तरांचल के प्रथम गीता शिक्षण केंद्र की ओर से श्री गुणमाला सदन स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में संचालित गीता प्रथम सोपान की ग्यारहवीं कक्षा संपन्न हुई। कक्षा का शुभारंभ संस्कृत ध्येय मंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ। प्रथम सत्र में आचार्य विष्णु दत्त गौड़ ने ग्यारहवें अध्याय के अभ्यास कार्यों में दिए गए दिशा एवं स्थानवाचक शब्दों का अभ्यास कराया। प्रतिभागियों को पुरतः (आगे), पृष्ठतः (पीछे), वामतः (बाएं), दक्षिणतः (दाएं), उपरि (ऊपर) और अधः (नीचे) आदि शब्दों का दैनिक जीवन में संस्कृत वाक्यों के माध्यम से प्रयोग कराया गया। द्वितीय सत्र में डॉ. कल्पना वत्स ने श्रीमद्भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय के छठे से दसवें श्लोक तक का अध्ययन कराया। श्लोकों का संधि-विच्छेद, शुद्ध उच्चारण और सस्वर गायन कराया गया। सामूहिक पुनरावृत्ति के माध्यम से प्रतिभागियों ने श्लोकों को कंठस्थ करने का अभ्यास किया। डॉ. कल्पना वत्स ने दैनिक जीवन के उदाहरणों से श्लोकों में निहित जीवनोपयोगी संदेश समझाए। उन्होंने कहा कि गीता उचित निर्णय, कर्तव्यबोध और मानसिक संतुलन का मार्गदर्शन करती है। इस दौरान एसके शर्मा, ज्ञान, जितेंद्र गुप्ता, डॉ. अशोक सैनी, सुभाष सैनी, रंजीता, सत्यभामा आदि प्रतिभागी उपस्थित रहे।