जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। बुखार से पीड़ित एक मरीज में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके बाद विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। जलभराव वाले इलाकों पर नजर रखी जा रही है।
इस बार बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जलभराव के कारण जलजनित रोगों खतरा बना हुआ है। इसी के चलते बुखार से पीड़ित मरीजों की डेंगू जांच कराई जा रही है। बुखार से पीड़ित एक मरीज में डेंगू की पुष्टि हो गई है। मरीज पिछले कुछ दिनों से बुखार से पीड़ित था। चिकित्सकों ने पहले उसकी रैपिड जांच कराई जिसमें वह पॉजिटिव आई। जिला मलेरिया अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया कि सिविल अस्पताल रुड़की की पैथोलॉजी लैब में एलाइजा जांच कराई गई थी। एक मरीज की यह जांच पॉजिटिव आई है। मरीज के घर व आसपास टीम जांच कर रही है ताकि यदि डेंगू का कोई लार्वा मिले तो उसे नष्ट कराया जा सके।
रुड़की में पांच और हरिद्वार में 10 वालंटियर बनाए, दिया प्रशिक्षण
डेंगू के खतरे को देखते हुए विभाग ने 15 वालंटियर बनाए हैं। इसमें से पांच रुड़की व 10 हरिद्वार में तैनात किए गए हैं। उन्हें मंगलवार को सिविल अस्पताल में प्रशिक्षण दिया गया है।
सिविल अस्पताल में जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक टीम प्रशिक्षण देने के लिए वेक्टर इंस्पेक्टर सीएम कंसवाल के नेतृत्व में रुड़की पहुंची। टीम में शामिल विशेषज्ञों ने वालंटियर को बताया कि डेंगू की पहचान कैसे की जाती है। वह क्षेत्र में नजर रखें। यदि कहीं पर भी डेंगू के संदिग्ध मरीज मिलते हैं तो इसकी जानकारी विभाग को दें ताकि टीम वहां पहुंचकर डेंगू का लार्वा तलाश सके और उसको नष्ट कर सके। जिला मलेरिया अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया कि ये वालंटियर पांच माह तक कार्य करेंगे। इनको अलग-अलग क्षेत्र दिए गए हैं। इसके लिए मानदेय भी दिया जाएगा। इस मौके पर वेक्टर इंस्पेक्टर सीएम कंसवाल, उषा बिष्ट, रामकेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
आशाओं को भी किया गया प्रशिक्षित
सिविल अस्पताल के सभाकक्ष में आशाओं को भी डेंगू को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। आशाओं को कहा गया कि वह अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक करें। डेंगू के लार्वा की पहचान बताएं। उसे कैसे नष्ट करें। इसका भी प्रशिक्षण दिया गया।