शुरुआत में ज्यादा बारिश होने और जलभराव के चलते पहले से ही माना जा रहा था कि इस बार डेंगू का प्रकोप पिछले सालों की अपेक्षा ज्यादा होगा। हालात यह हैं कि पिछले साल की अब तक की रिपोर्ट के मुकाबले अब तक डेंगू के मरीज लगभग दोगुना हो चुके हैं। वहीं विशेषज्ञ दीपावाली के बाद तक भी डेंगू का असर देखने को मिलने की आशंका जता रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे कदम नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। अब तक कहीं भी युद्धस्तर पर फॉगिंग और लार्वा नष्ट करने के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। यहां तक कि जिन स्थानों पर तेजी से डेंगू फैल रहा है। वहां भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंच पा रही हैं। क्षेत्र के माजरी और खेड़ी शिकोहपुर गांव में बुखार फैलने की खबरों के करीब एक सप्ताह टीमें पहुंची है। यह तब है जबकि खेड़ी शिकोहपुर में दो मौतें हो चुकी है। ऐसे में यह साफ हो रहा है कि न तो खतरे की गंभीरता के हिसाब से स्वास्थ्य विभाग और न ही प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की कमी भी एक बड़ी वजह बन रही है। इसके चलते डेंगू पर तेजी से कंट्रोल कर पाना नामुमकिन साबित हो रहा है। ऐसे में हरिद्वार के लिए विभाग की ओर से मजबूत योजना नहीं तैयार हुई तो आने वाले समय में डेंगू और अधिक जानलेवा बन सकता है।