अरे भाई! ये रामभगत का घर कौन सा है... कुछ इसी तरह गांवों में मेहमान और जानकर लोगों से पूछते-पूछते घर तलाशते हैं। अब इस समस्या से निजात मिलने वाली है। गांवों में हर घर के बाहर मकान नंबर की प्लेट लगेगी जिसपर मकान मालिक का नाम भी होगा। यही नहीं इस नंबर प्लेट पर एक स्लोगन भी होगा जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, शौचालय बनाएं और स्वच्छ भारत का संदेश देगा। नंबर प्लेट लगवाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को दी गई है।
अब तक ग्राम पंचायतों में घरों पर नेम प्लेट नहीं होती है। कोई अपने घर पर नेम प्लेट लगाता भी है तो उसपर मकान नंबर नहीं होता या फिर मकान मालिक स्वयं के हिसाब से आवासों को गिनकर मकान नंबर डलवा लेता है। कई लोग विभाग से मकान नंबर पूछकर खुद प्लेट लगवा भी लेते हैं लेकिन ज्यादातर मकानों पर नंबर प्लेट नहीं होती। अब ग्राम पंचायतों में भी बीडीओ ने ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को नंबर प्लेट लगवाने के निर्देश जारी किए हैं। एक नंबर प्लेट लगाने की कीमत 40 रुपये होगी। इसे दिलाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होगी। वहीं इस काम में अधिकारियों के साथ ही ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, सस्ता गल्ला विक्रेता, ग्राम रोजगार सेवक आदि सहयोग करेंगे।
सर्वे का काम होगा आसान
ग्राम पंचायतों में हर घर पर नंबर प्लेट लग जाने के बाद सरकारी विभाग की कई दिक्कतें एक साथ खत्म हो जाएंगी। मकानों की गिनती और पारिवारिक गणना आसान होगी। इसके अलावा वोटर लिस्ट बनाने और अन्य किसी भी प्रकार के सर्वे में ये नंबर प्लेट सहायक होगी। वहीं सरकारी विभाग के अलावा अन्य किसी भी विभाग या डाकघर से पहुंचने वाला पत्र अब किसी एक के घर नहीं पड़े रहेंगे।
ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को नंबर प्लेट लगवाने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था से जहां गांव की अलग पहचान होगी, वहीं सरकारी कार्यों में भी दिक्कतें कम हो जाएंगी।
-एसपी थपलियाल, बीडीओ रुड़की