रुड़की। सेना में भर्ती होने लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस से बिजनौर से सहारनपुर जा रहे युवकों के उत्पात और ट्रेन में पथराव में गिरफ्तारी के बाद उनके साथी हरकतों से बाज नहीं आए। रुड़की स्टेशन से ट्रेन रवाना होने के बाद फिर इन्होंने चेन पुलिंग कर दी। रहीमपुर फाटक के पास ट्रेन रुकने पर गंगनहर कोतवाली प्रभारी जवाहर लाल मौके पर पहुंचे और ट्रेन को इकबालपुर तक छोड़कर आए। उन्होंने सहारनपुर पुलिस को भी हंगामे की सूचना देकर अलर्ट किया।
युवकों के तांडव के दौरान बिजनौर से रुड़की के बीच करीब दो घंटे तक ट्रेन का एक डिब्बा पूरी तरह इनके कब्जे में रहा। इससे यात्री जहां सहमे रहे, वहीं बच्चे रोते-बिलखते रहे। ढंडेरा में पथराव होने पर जब हद हो गई तो कुछ यात्रियों ने हिम्मत दिखाकर पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। उसके बाद सिविल लाइंस कोतवाली से उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार टीम लेकर स्टेशन पहुंचे और हुड़दंगियों को पकड़कर नीचे उतारा। जीआरपी चौकी प्रभारी अमित कुमार व आरपीएफ प्रभारी आरबी सिंह भी युवकों को दबोचने में जुटे।
जीआरपी-आरपीएफ पर निकाली भड़ास
रुड़की रेलवे स्टेशन पहुंचने पर पुलिस ने जब आरोपियों को पीटकर डिब्बे से उतारा तो यात्रियों ने राहत की सांस ली। इस बीच यात्रियों के अंदर दो घंटे से पनप रहा आक्रोश भी फूट पड़ा। महिलाओं सहित अन्य यात्रियों ने स्टेशन पर बने जीआरपी व आरपीएफ के सहायता केंद्र पर पहुंचकर अपनी भड़ास निकाली। ट्रेन में कोई सहायता न मिलने पर भी उन्होंने सख्त नाराजगी जताई।
पकड़े गए आरोपियों के नाम
रुड़की। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम दीपक कुमार (पुत्र सूरज सिंह) निवासी गांव नवादा, तुलाका, थाना हल्दौर, कौशल (पुत्र राजेश निवासी) गांव ककनपुर, थाना हल्दौर, रिंकू (पुत्र हेमराज सिंह) निवासी नसीरपुर नैनसिंह, थाना हल्दौर, मोनू (पुत्र रामगोपाल सिंह) निवासी खासपुरा थाना हल्दौर, शिवम कुमार (पुत्र राकेश सिंह) एवं आरिफ (पुत्र खलील) निवासीगण गांव पुट्ठा हेमपुर, दीपा, जिला बिजनौर, यूपी बताया। जीआरपी ने आरोपियों के खिलाफ ट्रेन पर पथराव, चेन पुलिंग व सवारियों से मारपीट करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है।
फर्ज भूलकर पहुंचे जेल
रुड़की। देश के प्रति समर्पण के जज्बा पर बिजनौर के युवा सेना में भर्ती होने घर से निकले थे। सेना में जाने का पता चलने पर आसपास के लोगों ने भी उन्हें सम्मान की नजर से देखा। लेकिन देश के जिस फर्ज के लिए वह घर से निकले, ट्रेन में चढ़ते ही उसी फर्ज को भूल गए। ट्रेन में उनके उत्पात पर यात्रियों ने भी सवाल उठाए। कहा कि नागरिकों से जानवरों की तरह पेश आने वाले भला देश के लिए क्या कर पाएंगे। तांडव का आंखों देखा हाल सुनाते हुए बिजनौर निवासी ओमप्रकाश ने बताया कि वह परिवार के साथ बिजनौर से रुड़की आ रहे थे। युवकों ने ट्रेन में चढ़ते ही बिना मतलब के उत्पात मचाना शुरू कर दिया था। पथराव और लगातार हंगामे से तंग आकर उन्होंने पुलिस को सूचना दी।