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आखिरकार सात माह बाद पीड़ित को जगी न्याय की आस

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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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उत्पीड़न मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद रविवार को इंस्पेक्टर और एसएसआई के लाइन हाजिर होने से आखिरकार कयाकिंग कैनोइंग कोच फिरोज खान को न्याय की आस जगी है। वह पिछले सात महीने से पुलिस अधिकारियों से लेकर मंत्रियों के चक्कर काट रहे थे। वहीं, अभी मामले की विस्तृत जांच होनी बाकी है। इसके बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होगी।
कयाकिंग कैनोइंग कोच फिरोज खान ने तत्कालीन सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी साधना त्यागी और एसएसआई हरपाल सिंह पर आरोप लगाया था कि पिछले साल 27 जुलाई को दोनों ने उन्हें फोन कर अपने पास बुलाया था। आरोप था कि एक कारोबारी उससे रंजिश रखता था। इसी वजह से इंस्पेक्टर और एसएसआई ने पांच दिनों तक हथकड़ी लगाकर उन्हें अवैध हिरासत में रखा था। इतना ही नहीं 151 में फर्जी चालान दर्शाकर एसडीएम के सामने पेश करने की मनगढ़ंत कहानी बनाई थी। आरोप लगाया था कि दोनों ने उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया था। पीड़ित ने इंसाफ के लिए एसएसपी से लेकर आईजी और मंत्रियों के दर पर जाकर गुहार लगाई थी।
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इसके बावजूद इंसाफ नहीं मिला तो फिरोज खान ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया तो मामले की जांच एसपी यातायात मंजूनाथ टीसी को सौंपी गई। एसपी ने एक महीने की जांच के बाद इंस्पेक्टर और एसएसआई को प्रथम दृष्टया दोषी पाया और कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी को भेजी। एसएसपी ने दोनों पर केस दर्ज करने के बाद रविवार को लाइन हाजिर कर दिया। इस कार्रवाई में भले ही बहुत समय लग गया, लेकिन अब फिरोज खान को न्याय की आस जगी है।
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