लवजीत शर्मा, रुड़की
मल्टीनेशनल कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनाकर पकड़े जाने के डर से उन्हें उत्तराखंड के बाहर खपाया जाता था। नकली दवा फैक्ट्रियों के भंडाफोड़ के बाद गिरफ्तार हुए आरोपियों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। औषधि निरीक्षक के मुताबिक, एक बड़े नेटवर्क के गठजोड़ से नकली दवाओं के बाहर बेचने की बात सामने आई है। संबंधित नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
औषधि निरीक्षक, हरिद्वार नीरज कुमार ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि नकली दवाओं का कारोबार यूपी के कई जिलों समेत अन्य राज्यों में भी फैला हुआ था। पूछताछ में पता चला है कि रुड़की में तैयार नकली दवाएं उत्तर प्रदेश के बरेली, आगरा, अमरोहा, मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद समेत दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बिहार और राजस्थान में सप्लाई की जाती हैं। यूपी और उत्तराखंड की औषधि विभाग की टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली दवाएं बनाने के लिए कच्चा माल कहां से आता था और किस नाम से आता था। साथ ही यह जानकारी भी जुटाई जा रही है कि रुड़की में जो नकली दवाएं बरामद हुई हैं, उनके अलावा कौन-कौन की और दवाएं बनाई जा रही थीं। इन दवाओं की किन-किन मेडिकल स्टोर और अस्पतालों में सप्लाई की जा रही थी।
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दवाएं वापस लेने के निर्देश
उधर, मुरादाबाद औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक का कहना है कि जिन कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनाई जा रही थीं, उनके अधिकारियों से वार्ता कर संबंधित बैच नंबरों की दवाएं मेडिकल स्टोरों से वापस लेने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि कुछ जिले ऐसे भी हैं, जहां नकली दवाओं की सप्लाई हुई है, लेकिन पता नहीं चला। वहां के औषधि निरीक्षकों से वार्ता कर कार्रवाई करने को कहा गया है।