रुड़की। जातीय उन्माद के बीच गांव दर गांव में सुलग रही आग के बीच अब दलित समाज के लोग ही मझधार में डांवाडोल होती पुलिस प्रशासन की नैया को पार लगाएंगे। इसके लिए खास रणनीति के तहत पुलिस मूर्ति समितियों के जरिये आने वाले विरोध को शांत करने के कदम उठाएगी।
गौरतलब है कि देशभर में जगह-जगह मूर्तियों को तोड़कर जातीय संघर्ष को हवा देने वाले अराजकतत्वों से सुरक्षा एवं उनकी पहचान उजागर करने के लिए जनवरी माह में पुलिस प्रशासन ने गांव-गांव में मूर्ति समितियों का गठन किया था। शांति समितियों की तर्ज पर गठित की गई इन समितियों के जरिये पुलिस और दलित समाज के बीच सामंजस्य स्थापित करने की योजना है, लेकिन पुलिस प्रशासन समितियों का गठन करने के बाद इन समितियों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था, लेकिन जब दो अप्रैल को क्षेत्र में हिंसा भड़की, तो अचानक पुलिस को इन समितियों की याद आई। चौदह अप्रैल को अंबेडकर जयंती के दौरान कोई अराजकतत्व मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ कर माहौल को और बिगाड़ने की कोशिश न करें। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने मूर्ति समितियों को सक्रिय करने की रणनीति तैयार की है। बताया गया है कि कोतवाली और थानों की पुलिस समितियों के साथ बैठक कर आपसी तालमेल बढ़ाएगी, ताकि आने वाले समय में इनका इस्तेमाल शांति स्थापित करने में किया जा सके। एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि जल्द ही मूर्ति समितियों के लोगों से वार्ता कर पुलिस और समिति के लोगों के बीच सामंजस्य स्थापित किया जाएगा।