ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान के दो प्रोफेसरों के खिलाफ मानसिक और यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराने वाली छात्रा को एक साल बाद भी संस्थान की ओर से शोध के लिए गाइड नहीं उपलब्ध कराया गया। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मामला संस्थान पर भारी पड़ सकता है। जांच अधिकारी एवं पुलिस क्षेत्राधिकारी चंदन सिंह बिष्ट ने इसकी पुष्टि की है।
करीब चार महीने पूर्व शहर के एक उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थान की छात्रा ने सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर संस्थान के प्रोफेसरों पर मानसिक और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। छात्रा का कहना था कि बार-बार मांग करने के बाद भी उसे एक साल से शोध के लिए गाइड नहीं दिया जा रहा है। इससे वह मानसिक रूप से भी प्रताड़ित हो रही है और उसका भविष्य भी खराब हो रहा है। मामले में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने कोतवाली में प्रदर्शन किया था। इसके बाद तत्कालीन एसएसपी ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर संस्थान के प्रोफेसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
जांच अधिकारी एवं पुलिस क्षेत्राधिकारी चंदन सिंह बिष्ट ने बताया कि मामले से जुड़े प्रोफेसरों और छात्रों के अलावा पीड़ित छात्रा के बयान दर्ज किए गए हैं। अभी तक की जांच में सामने आया है कि छात्रा को संस्थान की ओर से एक साल बाद शोध के लिए गाइड नहीं दिया गया है। इसके चलते उसकी पढ़ाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक, यह बात भी सामने आई है कि गाइड नहीं देने के चलते संस्थान में हर साल कुछ छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ रही है। ऐसे में छात्रा को एक साल से गाइड नहीं दिए जाने की जो बात जांच में सामने आ रही है, यह मामला उत्पीड़न की श्रेणी में साबित होता है तो संस्थान पर भारी पड़ सकता है।
दर्ज हो चुके हैं 56 लोगों के बयान
पुलिस क्षेत्राधिकारी मामले में अभी तक 56 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से 24 छात्र हैं। उन्होंने बताया कि मामले में करीब दस लोगों के और बयान दर्ज किए जा सकते हैं। जांच रिपोर्ट में काफी हद तक काम पूरा कर लिया गया है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर पड़ताल की जा रही है। जल्द ही उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।