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बिना टिकट सवारी ढोने पर रोडवेज का परिचालक बर्खास्त

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ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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देहरादून से टिहरी गढ़वाल के बड़ियारगढ़ जा रही पर्वतीय डिपो की रोडवेज बस में 10 यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करवाने के मामले में सात माह की जांच के बाद दोषी पाए जाने पर रोडवेज के स्थायी परिचालक को बर्खास्त कर दिया गया। परिचालक मृतक आश्रित कोटे से तीन साल पहले रोडवेज में भर्ती हुआ था और वर्तमान में रुड़की डिपो में कार्यरत था।
घटनाक्रम के अनुसार, 21 अप्रैल 2018 को पर्वतीय डिपो की एक बस देहरादून से बड़ियारगढ़ जा रही थी। रास्ते में रोडवेज के टिकट निरीक्षक (टीआई) ने घनशाली के पास जांच के दौरान घनशाली से बड़ियारगढ़ के 10 यात्रियों को बिना टिकट पकड़ा था। जांच के दौरान यात्रियों ने टीआई को बताया था कि उन्होंने घनसाली से बड़ियारगढ़ के बीच 50-50 रुपये किराया परिचालक को दिया, लेकिन परिचालक ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद रोडवेज के टीआई ने बस के परिचालक मनोज मेहर की ओर से 10 यात्रियों को बिना टिकट यात्रा कराने की रिपोर्ट पर्वतीय डिपो की एजीएम पूजा केहरा को दी थी।
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10 यात्रियों को बिना टिकट यात्रा कराने की सूचना के बाद रोडवेज मुख्यालय में खलबली मच गई। मुख्यालय के आदेश पर परिचालक मनोज मेहर का तबादला रुड़की डिपो में करने के साथ ही उसे निलंबित कर मामले की जांच जेएनएनयूआरएम हरिद्वार डिपो के एजीएम आलोक बनवाल को सौंपी गई। जांच अधिकारी ने रोडवेज के हिल डिपो के टीआई और परिचालक के बयान दर्ज किए थे। जांच में परिचालक को दोषी पाए जाने के बाद जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट रोडवेज मुख्यालय को भेजी थी। रोडवेज मुख्यालय के आदेश पर परिचालक मनोज मेहर को सोमवार को बर्खास्त कर दिया गया। उसके पिता पर्वतीय डिपो में चालक थे।
10 यात्रियों को बिना टिकट यात्रा कराने पर पकड़े जाने के बाद परिचालक का रुड़की डिपो में तबादला कर उसे निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद सात माह तक चली जांच के बाद मुख्यालय के आदेश पर 19 नवंबर को स्थायी परिचालक को बर्खास्त कर दिया गया।
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-रामलाल पैन्यूली, एजीएम रुड़की रोडवेज डिपो
जांच के दौरान संबंधित परिचालक और टिकट निरीक्षक के बयान दर्ज किए गए। इसमें आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय को भेजी गई थी। अब मुख्यालय के आदेश के बाद परिचालक पर कार्रवाई हुई।
-आलोक बनवाल, एजीएम जेएनएनयूआरएम हरिद्वार डिपो
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