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Roorkee News: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में पकड़ा गया बड़ा घोटाला

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II- किसानों के खेतों में बिना स्प्रिंकलर स्थापित किए ही कर दिया गया फर्मों को सीधे भुगतान
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I- किसानों को मिलने वाली 80 फीसदी अनुदान राशि में हुआ बड़ा खेल
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I- नाम किसी का, हस्ताक्षर कोई कर गया, अंगूठा लगाने वालों के भी अंग्रेजी में मिले हस्ताक्षर
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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में जिले में बड़ा घोटाला सामने आया है। रायपुर क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारियों ने किसानों को मिलने वाली अनुतों तक स्प्रिंकलर और पाइप पहुंचे नहीं लेकिन फर्म को सीधे पैसे पहुंचा दिए गए।
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Iइसके लिए बड़ी ही चतुराई से अधिकारियों ने किसानों को बिना बताए उनके आवेदन फॉर्म भरे। इन पर फोटो किसी का था और नाम किसी और का। हद तो तब हुई जब अधिकारियों ने जल्दबाजी में निरक्षर लोगों के भी हस्ताक्षर अंग्रेजी में कर डाले। जनसुनवाई में आईं कुछ शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराई। जांच में पुष्टि होने के बाद अब शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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Iइस मामले में तत्कालीन कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी रायपुर (वर्तमान में संबद्ध कृषि निदेशालय) राजदेव पंवार के खिलाफ जिलाधिकारी ने विभागीय जांच की संस्तुति की है। मामला रायपुर ब्लॉक के सिल्ला और रामनगर डांडा का है। पिछले दिनों जनसुनवाई में कुछ लोगों ने जिलाधिकारी को शिकायत की थी कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में बड़ी गड़बड़ी हुई है। इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को समिति गठित कर जांच करने के निर्देश दिए।
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Iजांच के लिए मुख्य कृषि अधिकारी, कृषि भूमि संरक्षण अधिकारी सहसपुर, अवर सहायक अभियंता कृषि को शामिल करते हुए जांच समिति बनाई गई। समिति ने गांवों स्थलीय निरीक्षण किया तो बिल, अनुदान फॉर्म और अन्य बिलों की जांच की गई। पता चला कि योजना में धरातल पर नियमानुसार कार्य किए बिना ही किसानों का सत्यापन कर अनुदान बिलों का भुगतान कर दिया गया। जबकि, ग्राम सिल्ला में सिंचाई पाइप, स्प्रिंकलर और अन्य सिंचाई के साधन थे ही नहीं।
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Iजांच शुरू हुई तो अन्य किसानों ने भी स्प्रिंकलर सेट न मिलने की शिकायत की। इसी तरह ग्राम रामनगर डांडा में किसानों की भूमि पर स्प्रिंकलर सेट नहीं लगे थे। जबकि, कार्य का भुगतान संबंधित फर्म को पहले ही किया जा चुका था। जांच में पाया गया कि एक महिला के आवेदन पर हस्ताक्षर दूसरी महिला के पाए गए। यही नहीं अंग्रेजी में हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर हिंदी में थे। जो लोग अंगूठा लगाते थे उनके भी हस्ताक्षर अंग्रेजी तक में कर दिए गए। प्रार्थना पत्र और आवेदन के साथ नत्थी शपथपत्र पर सभी किसानों के जो हस्ताक्षर थे वे भी अलग-अलग थे। कार्यालय के बिलों के साथ किसानों की फोटो भी अलग-अलग पाई गई।
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Iकरना था डीबीटी से भुगतान, कर दिया सीधे फर्मों को
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Iइस योजना के तहत कुल 80 फीसदी अनुदान किसानों को मिलना होता है। इसमें 55 फीसदी केंद्र पोषित और 25 फीसदी राज्य पोषित योजना से होता है। इस अनुदान को किसानों के खाते में डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से भेजा जाता है। इसके बाद ही फर्मों को यह भुगतान किया जाता है। लेकिन, इन दोनों गांवों में कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी रायपुर ने सीधे ही बिलों को निकाला और फर्मों को भेज दिया। यही नहीं, एक ही वित्तीय वर्ष में एक किसान के नाम से दो बार स्प्रिंकलर सेट लगाने के लिए अनुदान दर्शाया गया।
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Iजांच टीम पहुंची तो पहुंचने लगे पाइप के ट्रक
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Iअधिकारियों ने चालबाजी में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। टीम जब जांच के लिए गांवों में पहुंची तो उन्हें देखकर आनन फानन में स्प्रिंकलर सेट और सिंचाई पाइप भी पहुंचाए जाने लगे। एक के बाद एक ट्रक गांवों में आने लगे। लेकिन, जांच अधिकारियों ने इन ट्रकों को रुकवाकर प्रशासन के हवाले कर दिया। मामले में अब फर्मों के खिलाफ भी जांच के आदेश जिलाधिकारी ने दिए हैं।
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Iमृतक के नाम पर भी निकाल लिया गया अनुदान
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Iएक महिला ने इस मामले में शिकायत की थी कि उनके पति के नाम पर भी बिना बताए अनुदान राशि निकाल ली गई है। जबकि, उनके पति मौत हो चुकी है। इसी तरह कई और कारनामे भी अधिकारियों ने किए हैं। इस मामले में अधिकारियों ने घोटाले की रकम का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, बताया जा रहा है कि घोटाले की यह राशि कई लाख रुपये हो सकती है।
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Iप्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में घोटाले की शिकायत जनसुनवाई में आई थी। इसकी जांच कराई गई तो घोटाले की पुष्टि हुई। तत्कालीन कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी रायपुर राजदेव पंवार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति का पत्र शासन को भेज दिया गया है। साथ ही जांच रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई है। - सोनिका, जिलाधिकारी, देहरादून।I
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