- नुकीली वस्तु से दिल में लगी गंभीर चोट, छह दिन के इलाज के बाद मरीज को मिली अस्पताल से छुट्टी
ऋषिकेश। नुकीली वस्तु से दिल में गहरी चोट लगने के बाद गंभीर हालत में एम्स ऋषिकेश पहुंचे श्यामपुर निवासी युवक की ट्रॉमा विशेषज्ञों की टीम ने बेहद चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर जान बचा ली। मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि चिकित्सकों को धड़कते दिल के साथ सर्जरी करनी पड़ी। चिकित्सीय भाषा में इसे ऑफ-पंप सर्जरी कहा जाता है। यह प्रक्रिया बेहद जोखिमभरी मानी जाती है और इसमें हार्ट-लंग मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। सफल सर्जरी के बाद छह दिनों तक गहन चिकित्सा और निगरानी में रखने के पश्चात मरीज को 3 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा सर्जरी विभाग की ओर से यह जटिल सर्जरी 27 अगस्त को की गई। ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. एम. क्यू. आजम ने बताया कि पेनिट्रेटिंग कार्डियक इंजरी यानी दिल में गहरी चोट के मामलों में उपचार के लिए समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे गंभीर मामलों में मरीज की जान बचाने के लिए चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय और टीमवर्क की अहम भूमिका रहती है। सर्जरी करने वाले ट्रॉमा सर्जन डॉ. नीरज सिंह के अनुसार, 27 अगस्त को श्यामपुर निवासी एक युवक को गंभीर अवस्था में ट्रॉमा इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। मरीज के दिल में किसी नुकीली वस्तु से गहरी चोट लगी थी, जिसके कारण उसका रक्तचाप काफी कम हो गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया और मरीज को इमरजेंसी लाइफ-सेविंग सर्जरी के लिए ले जाया गया। डॉ. नीरज ने बताया कि मरीज की गंभीर स्थिति के कारण सर्जरी के दौरान हार्ट-लंग मशीन का इस्तेमाल करना संभव नहीं था। ऐसे में विशेषज्ञों ने धड़कते दिल के साथ ऑफ-पंप सर्जरी को अंजाम दिया। यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिमभरी थी, लेकिन चिकित्सकों के सामूहिक प्रयास से सर्जरी सफल रही। सर्जरी के बाद मरीज को छह दिनों तक गहन चिकित्सा एवं विशेष निगरानी में रखा गया। उपचार के दौरान उसकी स्थिति में लगातार सुधार हुआ और स्वस्थ होने के बाद उसे 3 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस जटिल सर्जरी को अंजाम देने वाली ट्रॉमा सर्जरी टीम में डॉ. नीरज कुमार, डॉ. एकता, डॉ. रुशल और डॉ. गर्वित शामिल रहे। वहीं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रवीण तलवार, डॉ. संदीप और डॉ. मिन्हाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।