परमार्थ निकेतन आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय ऋषिकेश योग महोत्सव का समापन किया गया। अंतिम दिन सभी प्रतिभागियों और योगाचार्यों ने परमार्थ गंगा आरती में वेद मंत्रों के साथ विश्व शांति की कामना कर योग महोत्सव का समापन किया।महोत्सव में 20 से अधिक देशों के 200 से अधिक योग जिज्ञासुओं ने योग व ध्यान की विभिन्न विधाओं को आत्मसात किया। योग साधकों ने यहां पर विभिन्न योग शैलियों, ध्यान, प्राचीन शास्त्रों का अध्ययन किया। साथ मां गंगा की आरती और विशेष यज्ञ में प्रतिभाग किया। योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती और योगाचार्य गंगा नंदिनी ने प्रारंभिक योग सत्र की शुरुआत की। जिसमें सभी साधकों को योग के मूल सिद्धांतों और आसनों से परिचित कराया गया। परमार्थ निकेतन ने महोत्सव में शहर के विभिन्न योग स्कूलों, विद्यालयों और कार्यशालाओं को उनके योगदान के लिए नटराज पुरस्कार से सम्मानित किया। साध्वी भगवती सरस्वती ने समर्पित योग शिक्षकों और संस्थाओं के कार्यों की सराहना की। कहा कि ऋषिकेश को योग की आध्यात्मिक नगरी बनाने में सभी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। कहा कि योग महोत्सव का उद्देश्य योग की प्राचीन परंपराओं को पुन: जागृत करना और विभिन्न देशों से आए योग प्रेमियों को योग, ध्यान और साधना की गहरी समझ प्रदान करना था।