चैत्र मास के पहले नवरात्र पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। मठ-मंदिरों में सुबह से शाम तक माता के भजनों की प्रस्तुति रही। शाम ढलते के बाद व्रती लोगों ने मां शैलपुत्री की पूजा के बाद व्रत का समापन किया।
मंगलवार को मठ-मंदिर और घरों में लोगों ने विधि-विधान के साथ कलश की स्थापना की। कई जगहों पर लोगों ने कुल पुरोहित के मदद से घर और मठ मंदिरों में कलश स्थापित किया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने जौ की हरियाली बोई। श्रद्धालुओं ने सुबह से शाम तक व्रत रखा। व्रती लोगों ने फल, ड्राई फ्रूट, कूट्टू के आटा, दूध आदि से बनने वाले व्यंजनों को ग्रहण किया।
कई लोगों ने घरों पर भजन-कीर्तन कर मां दुर्गा के नौ रूपों का गुणगान किया। मठ-मंदिर आईडीपीएल दुर्गा मंदिर, सोमेश्वरनगर, भद्रकाली, वीरभद्र आदि जगहों पर विभिन्न मंडली से आई महिलाओं ने माता के भजनों की प्रस्तुति दी। माता के भजनों में श्रद्धालु ने जमकर नृत्य किया। सूर्यास्त होते ही व्रती लोगों ने शैलपुत्री की पूजा कर उपवास तोड़ा।